top button
    Futurestudyonline Community

ब्यापार में सफलता के योग

0 votes
417 views
ब्यापार में सफलता के योग जातक की कुंडली में दशम भाव से उसके ब्यबसाय की स्थिति को देखा जाता है |दशम भाव और उसका स्वामी यदि कुंडली में मजबूत स्थिति में होगा तो जातक अपने ब्यबसाय में जातक अत्यंत सफलता अर्जित करता है | १- जातक की कुंडली में यदि लग्न का स्वामी दशम भाव में स्थित हो तो जातक सफल ब्यबसायी बनता है | २- यदि लग्न और दशम भाव के स्वामियों का आपस में राशि परिवर्तन हो तो जातक अपने ब्यबसाय में अत्यधिक उन्नति करता है | ३- यदि लग्न और दशम भाव के स्वामियों की केंद्र - त्रिकोण में युति हो तो जातक अपने ब्यबसाय में अपार सफलता अर्जित करता है | ४- सातवे और दशमे भाव के स्वामियों की युति भी जातक को सफल ब्यबसायी बनाती है | ५- यदि बुध गृह केंद्र - त्रिकोण में बलवान स्तिथि में हो तो जातक सफल ब्यबसायी बनता है | use app for consultation Success, business

References

Success, business
posted Mar 4, 2021 by Rakesh Periwal

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button

Related Articles
+1 vote
हिन्दू धर्म में शुभ-अशुभ का बड़ा महत्व होता हैं। हिन्दू धर्म में किसी भी कार्य को करने से पहले उसका शुभ मूर्हत देखा जाता हैं, ताकि उस काम में सफलता प्राप्त हो। हिन्दू धर्म में सप्ताह के हर वार का अपना महत्व होते हैं। सप्ताह के हर दिन से सम्बंधित कई कार्य हैं जिनमें से कुछ उस दिन के लिए निषेध हैं तो कुछ उस वार के लिए शुभ। आज हम आपको बताने जा रहे हैं वार के अनुसार किये जाने वाले काम जो उस दिन किये जाने चाहिए। तो आइये जानते हैं कौनसे दिन क्या काम करना शुभ। * रविवार : यह सूर्य देव का वार माना गया है। इस दिन नवीन गृह प्रवेश और सरकारी कार्य करना चाहिए। विज्ञान, इंजीनियरिंग, सेना, उद्योग बिजली, मैडिकल एवं प्रशासनिक शिक्षा उत्तम, नवीन वस्त्र धारण, सोने और तांबे की वस्तुओं के नवीन आभूषण धारण करने शुभ होते हैं। * सोमवार : सोमवार के दिन आप कृषि संबंधी कोई भी नया कार्य प्रारंभ करें, फलित ही होगा। कृषि संबंधी कार्य जैसे कि खेती यंत्र खरीदी, बीज बोना, बगीचा, फल के वृक्ष लगाना, आदि इस दिन करें। इसके अलावा वस्त्र तथा रत्न धारण करना, औसत क्रय-विक्रय, भ्रमण-यात्रा, कला कार्य, स्त्री प्रसंग, नवीन कार्य, अलंकार धारण करना, पशुपालन, वस्त्र आभूषण का क्रय-विक्रय हेतु इस दिन शुभ होता है। * मंगलवार : मंगल देव के इस दिन विवाद एवं मुकद्दमे से संबंधित कार्य करने चाहिए। बिजली से संबंधित कार्य, सर्जरी की शिक्षा, शस्त्र विद्या सीखना, अग्नि स्पोर्टस, भूगर्भ विज्ञान, दंत चिकित्सा, मुकदमा दायर करना शुभ है। लेकिन इस दिन भूल कर भी किसी से उधार न लें। * बुधवार : यदि आप किसी को ऋण दे रहे हैं, तो बुधवार को दें। इस दिन दिया हुआ ऋण आपके पास जल्दी वापस आ जाता है। इसके अलावा शिक्षा-दीक्षा विषयक कार्य, विद्यारंभ अध्ययन, सेवावृत्ति, बहीखाता, हिसाब विचार, शिल्पकार्य, निर्माण कार्य, नोटिस देना, गृहप्रवेश, राजनीति विचार शुभ है। * गुरुवार : यूं तो यह दिन सबसे अधिक शुभ माना जाता है, लेकिन इस दिन आप ऐसे कौन से कार्य करें कि वह सफल हों यह जान लीजिए। इस दिन ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा, धर्म संबंधी कार्य, अनुष्ठान, विज्ञान, कानूनी कार्य, नई शिक्षा आरंभ करना, गृह शांति, मांगलिक कार्य, आदि शुभ कार्य साथ ही सफल होते हैं। * शुक्रवार : शुक्र ग्रह से प्रभावित होता है यह दिन। इस दिन सांसारिक कार्य, गुप्त विचार गोष्ठी, प्रेम व्यवहार, मित्रता, वस्त्र, मणिरत्न धारण तथा निर्माण, अर्क, इत्र, नाटक, छायाचित्र फिल्म, संगीत आदि कार्य शुभ भण्डार भरना, खेती करना, हल प्रवाह, धान्या रोपण, आयु ज्ञान शिक्षा शुभ है। * शनिवार : मकान बनाना, गृह प्रवेश, ऑपरेशन, तकनीकी शिल्प कला, मशीनरी संबंधित ज्ञान, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी का ज्ञान सीखना, तेल लगाना विशेष शुभ, मुकदमा दायर करना शुभ है।
0 votes
ज्योतिष के अनुसार चांदी में तेजी और मंदी के योग ज्योतिष में ग्रह की पूरे मार्केट को प्रभावित करती है यह पर चाँदी के बारे मे जानकारी दी जा रही है चांदी में अचानक बहुत तेजी आ जाती है या यहमंदीहो जाती है। ऐसा क्यों होता है? इसके लिए ज्योतिष में कुछ ग्रहों को कारक माना जाता है। चांदी में तेजी या मंदी निम्र ग्रह योगों के होने पर भी तेजी और मंदी की सम्भावना रहती है | मंदी का योग * मंगल अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण पर आए तो यह चांदी में मंदी का संकेत है। * सोमवारी अमावस्या चांदी को मंदी करती है। * शनि के मार्गी या वक्री होने पर चांदी में मंदी आ सकती है। * शुक्र का वक्री होकर अस्त होना चांदी में मंदी करा सकता है। * बुध, शुक्र या बुध-चंद्र की युती चांदी में मंदी ला सकती है। * शुक्लपक्ष 16 दिनों का हो तो चांदी में मंदी आती है। * बुधवार के दिन चंद्र दर्शन चांदी में मंदी करता है। तेजी के योग * बुध या गुरु के वक्री होने पर चांदी के भाव तेज होना संभव है। * शुक्रवार, शनिवार का चंद्र दर्शन चांदी में तेजी करवा सकता है। * शुभ ग्रह रहित पुष्प या धनिष्ठा नक्षत्र चांदी में तेजी का कारण बनते हैं। * बुध-गुरु-शुक्र में से कोई भी ग्रह अस्त होने पर चांदी में तेजी होना संभव है। * किसी महीने में पांच बुधवार होने पर चांदी में उतार-चढ़ाव आकर तेजी होना संभव है। * शुक्लपक्ष की पंचमी मंगलवारी हो तो चांदी में तेजी हो सकती है। * सूर्य की संक्रांति के समय सूर्य चंद्र एक राशि पर आने से चांदी में तेजी आना संभव है। * बुध, गुरु का उदय तथा पश्चिम का शुक्रास्त चांदी में तेजी लाता है। www.futurestudyonline.com https://youtu.be/OLMp3Uw2HLc
0 votes

उच्च सफलता के योग-

1. जन्म-कुंडली में दशम स्थान

जन्म-कुंडली में दशम स्थानको (दसवां स्थान) को तथा छठे भाव को जॉब आदि के लिए जाना जाता है। सरकारी नौकरी के योग को देखने के लिए इसी घर का आकलन किया जाता है। दशम स्थान में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति की दृष्टि पड़ रही होती है साथ ही उनका सम्बन्ध छठे भाव से हो तो सरकारी नौकरी का प्रबल योग बन जाता है। कभी-कभी यह भी देखने में आता है कि जातक की कुंडली में दशम में तो यह ग्रह होते हैं लेकिन फिर भी जातक को संघर्ष करना पड़ रहा होता है तो ऐसे में अगर सूर्य, मंगल या ब्रहस्पति पर किसी पाप ग्रह (अशुभ ग्रह) की दृष्टि पड़ रही होती है तब जातक को सरकारी नौकरी प्राप्ति में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अतः यह जरूरी है कि आपके यह ग्रह पाप ग्रहों से बचे हुए रहें।

2. जन्म कुंडली में जातक का लग्न

जन्म कुंडली में यदि जातक का लग्न मेष, मिथुन, सिंह, वृश्चिक, वृष या तुला है तो ऐसे में शनि ग्रह और गुरु (वृहस्पति) का एक-दूसरे से केंद्र या त्रिकोण में होना, सरकारी नौकरी के लिए अच्छा योग उत्पन्न करते हैं।

3. जन्म कुंडली में यदि केंद्र में अगर चन्द्रमा, ब्रहस्पति एक साथ होते हैं तो उस स्थिति में भी सरकारी नौकरी के लिए अच्छे योग बन जाते हैं। साथ ही साथ इसी तरह चन्द्रमा और मंगल भी अगर केन्द्रस्थ हैं तो सरकारी नौकरी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

4. कुंडली में दसवें घर के बलवान होने से तथा इस घर पर एक या एक से अधिक शुभ ग्रहों का प्रभाव होने से जातक को अपने करियर क्षेत्र में बड़ी सफलताएं मिलतीं हैं तथा इस घर पर एक या एक से अधिक बुरे ग्रहों का प्रभाव होने से कुंडली धारक को आम तौर पर अपने करियर क्षेत्र में अधिक सफलता नहीं मिल पाती है।

5. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य तथा चंद्र को राजा या प्रशासन से सम्बंध रखने वाले ग्रह के रूप में जाना जाता है। सूर्य या चंद्र का लग्न, धन, चतुर्थ तथा कर्म से सम्बंध या इनके मालिक के साथ सम्बंध सरकारी नौकरी की स्थिति दर्शाता है। सूर्य का प्रभाव चंद्र की अपेक्षा अधिक होता है।

6. लग्न पर बैठे किसी ग्रह का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में सबसे अधिक प्रभाव रखने वाला माना जाता है। लग्न पर यदि सूर्य या चंद्र स्थित हो तो व्यक्ति शाषण से जुडता है और अत्यधिक नाम कमाने वाला होता है।

7. चंद्र का दशम भाव पर दृष्टी या दशमेश के साथ युति सरकारी क्षेत्र में सफलता दर्शाता है। यधपि चंद्र चंचल तथा अस्थिर ग्रह है जिस कारण जातक को नौकरी मिलने में थोडी परेशानी आती है। ऐसे जातक नौकरी मिलने के बाद स्थान परिवर्तन या बदलाव के दौर से बार बार गुजरते है।

8. सूर्य धन स्थान पर स्थित हो तथा दशमेश को देखे तो व्यक्ति को सरकारी क्षेत्र में नौकरी मिलने के योग बनते है। ऐसे जातक खुफिया ऐजेंसी या गुप चुप तरीके से कार्य करने वाले होते है।

9. सूर्य तथा चंद्र की स्थिति दशमांश कुंडली के लग्न या दशम स्थान पर होने से व्यक्ति राज कार्यो में व्यस्त रहता है ऐसे जातको को बडा औहदा प्राप्त होता है।

10. यदि ग्रह अत्यधिक बली हो तब भी वें अपने क्षेत्र से सम्बन्धित सरकारी नौकरी दे सकते है। मंगल सैनिक, या उच्च अधिकारी, बुध बैंक या इंश्योरेंस, गुरु- शिक्षा सम्बंधी, शुक्र फाइनेंश सम्बंधी तो शनि अनेक विभागो में जोडने वाला प्रभाव रखता है।

11. सूर्य चंद्र का चतुर्थ प्रभाव जातक को सरकारी क्षेत्र में नौकरी प्रदान करता है। इस स्थान पर बैठे ग्रह सप्तम दृष्टि से कर्म स्थान को देखते है।

12. सूर्य यदि दशम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति को सरकारी कार्यो से अवश्य लाभ मिलता है। दशम स्थान कार्य का स्थान हैं। इस स्थान पर सूर्य का स्थित होना व्यक्ति को सरकारी क्षेत्रो में अवश्य लेकर जाता है। सूर्य दशम स्थान का कारक होता है जिस कारण इस भाव के फल मिलने के प्रबल संकेत मिलते है।

13. यदि किसी जातक की कुंडली में दशम भाव में मकर राशि में मंगल हो या मंगल अपनी राशि में बलवान होकर प्रथम, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम या दशम में स्थित हो तो सरकारी नौकरी का योग बनता है ।

14. यदि मंगल स्वराशि का हो या मित्र राशि का हो तथा दशम में स्थित हो या मंगल और दशमेश की युति हो तो सरकारी नौकरी का योग बनता है ।

15. चंद्र केंद्र या त्रिकोण में बली हो तो सरकारी नौकरी का योग बनाता है ।

16. यदि सूर्य बलवान होकर दशम में स्थित हो या सूर्य की दृष्टि दशम पर हो तो जातक सरकारी नौकरी में जाता है ।

17. यदि किसी जातक की कुंडली में लग्न में गुरु या चौथे भाव में गुरु हो या दशमेश ग्यारहवे भाव में स्थित हो तो सरकारी नौकरी का योग बनता है ।

18. यदि जातक की कुंडली में दशम भाव पर सूर्य, मंगल या गुरु की दृष्टि पड़े तो यह सरकारी नौकरी का योग बनता है ।

19. यदि १० भाव में मंगल हो, या १० भाव पर मंगल की दृष्टी हो,

20. यदि मंगल ८ वे भाव के अतिरिक्त कही पर भी उच्च राशी मकर (१०) का होतो।

21. मंगल केंद्र १, ४, ७, १०, या त्रिकोण ५, ९ में हो तो.

22. यदि लग्न से १० वे भाव में सूर्य (मेष) , या गुरू (४) उच्च राशी का हो तो। अथवा स्व राशी या मित्र राशी के हो।

23. लग्नेश (१) भाव के स्वामी की लग्न पर दृष्टी हो।

24. लग्नेश (१) +दशमेश (१०) की युति हो।

25. दशमेश (१०) केंद्र १, ४, ७, १० या त्रिकोण ५, ९ वे भाव में हो तो। उपरोक्त योग होने पर जातक को सरकारी नौकरी मिलती है। जितने ज्यादा योग होगे , उतना बड़ा पद प्राप्त होगा।

26. भाव:कुंडली के पहले, दसवें तथा ग्यारहवें भाव और उनके स्वामी से सरकारी नौकरी के बारे मैं जान सकते हैं।

27.सूर्य. चंद्रमा व बृहस्पति सरकारी नौकरी मै उच्च पदाधिकारी बनाता है।

28. भाव :द्वितीय, षष्ठ एवं दशम्‌ भाव को अर्थ-त्रिकोण सूर्य की प्रधानता होने पर सरकारी नौकरी प्राप्त करता है।

29. नौकरी के कारक ग्रहों का संबंध सूर्य व चन्द्र से हो तो जातक सरकारी नौकरी पाता है।

30. दसवें भावमें शुभ ग्रह होना चाहिए।

31. दसवें भाव में सूर्य तथा मंगल एक साथ होना चाहिए।

32. पहले, नवें तथा दसवें घर में शुभ ग्रहों को होना चाहिए।

33. पंच महापुरूष योग: जीवन में सफलता एवं उसके कार्य क्षेत्र के निर्धारण में महत्वपूर्ण समझे जाते हैं।पंचमहापुरूष योग कुंडली में मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र एवं शनि अपनी स्वराशि अथवा उच्च राशि का होकर केंद्र में स्थित होने पर महापुरुष योग बनता

34. पाराशरी सिद्धांत के अनुसार, दसवें भाव के स्वामी की नवें भाव के स्वामी के साथ दृष्टि अथवा क्षेत्र और राशि स्थानांतर संबंध उसके लिए विशिष्ट राजयोग का निर्माण करते हैं।

कुंडली से जाने नौकरी प्राप्ति का समय नियम:

1. लग्न के स्वामी की दशा और अंतर्दशा में

2. नवमेश की दशा या अंतर्दशा में

3. षष्ठेश की दशा या, अंतर्दशा में

4. प्रथम,दूसरा , षष्ठम, नवम और दशम भावों में स्थित ग्रहों की दशा या अंतर्दशा में

5. दशमेश की दशा या अंतर्दशा में

6. द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में

7. नौकरी मिलने के समय जिस ग्रह की दशा और अंतर्दशा चल रही है उसका संबंध किसी तरह दशम भाव या दशमेश से ।

8. द्वितीयेश और एकादशेश की दशा या अंतर्दशा में भी नौकरी मिल सकती है।

9. छठा भाव :छठा भाव नौकरी का एवं सेवा का है। छठे भाव का कारक भाव शनि है।

10. दशम भाव या दशमेश का संबंध छठे भाव से हो तो जातक नौकरी करता है।

11. राहु और केतु की दशा, या अंतर्दशा में :

जीवन की कोई भी शुभ या अशुभ घटना राहु और केतु की दशा या अंतर्दशा में हो सकती है।

12. गोचर: गुरु गोचर में दशम या दशमेश से केंद्र या त्रिकोण में ।

13. गोचर : नौकरी मिलने के समय शनि और गुरु एक-दूसरे से केंद्र, या त्रिकोण में हों तो नौकरी मिल सकती है

14. गोचर : नौकरी मिलने के समय शनि या गुरु का या दोनों का दशम भाव और दशमेश दोनों से या किसी एक से संबंध होता है।

15. कुंडली का पहला, दूसरा, चौथा, सातवा, नौवा, दसवा, ग्यारहवा घर तथा इन घरों के स्वामी अपनी दशा और अंतर्दशा में जातक को कामयाबी प्रदान करते है।

0 votes
कुंडली में शुभ ग्रहों की स्थिति, युति या दृष्टि से राज योग का निर्माण होता है। कुंडली में मौजूद राज योग से आपके जीवन की कई परेशानियां दूर हो जाती हैं। कुंडली में राज योग के होने से सकारात्मकता की भावना आपके अंदर आती है, राज योग के समय काल को जानकर आप इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सकते हैं। जरूरी कदम उठाकर आप अपने स्वर्णिम काल के दौरान अपने जीवन के लक्ष्यों की प्राप्ति कर सकते हैं। आपकी कुंडली में राज योग कुंडली में केंद्र (1, 4, 7, 10) और त्रिकोण (5, 9) भावों के बीच संबंध से राज योग का निर्माण होता है। इन भावों के स्वामियों के बीच जितना मजबूत संबंध होता है, उतना ही शक्तिशाली राज योग बनता है। लग्न को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है यह केंद्र के साथ-साथ यह त्रिकोण भाव भी माना जाता है। नीचे दी गई परिस्थितियों में जातक की कुंडली में राज योग का निर्माण होता है। जब केंद्र और त्रिकोण भाव के स्वामी एक दूसरे के साथ एक ही घर में होते हैं तो राज योग का निर्माण होता है। जब केंद्र और त्रिकोण भावों के स्वामी एक दूसरे पर दृष्टि डालते हैं तो कुंडली में राज योग बनता है। जब केंद्र और त्रिकोण भावों के स्वामी ग्रह परस्पर परिवर्तन योग में हैं तो बहुत मजबूत राज योग का निर्माण होता है। उदाहरण के लिये, वृषभ लग्न का स्वामी शुक्र नवम भाव में विराजमान है, जोकि एक त्रिकोण भाव है और इस भाव का स्वामी शनि लग्न में विराजमान है तो, यह बहुत शक्तिशाली राज योग बनता है। कुंडली में ग्रहों के परिवर्तन से ग्रहों के बीच शक्तिशाली संयोजन बनता है इसलिये यह राज योग बहुत शक्तिशाली होता है। ग्रहों की दृष्टि से सबसे मजबूत राज योग बनता है और उसके बाद ग्रहों की युति से। जितने शुभ ग्रहों का संयोजन एक कुंडली में होगा उतना शक्तिशाली राज योग बनेगा। अगर शुभ ग्रहों पर क्रूर ग्रहों की दृष्टि पड़ रही है तो राज योग की शक्ति कम हो जाती है। अगर किसी की कुंडली में एक से ज्यादा ऐसे संयोग बन रहे हैं जिनसे राज योग का निर्माण होता है तो यह बहुत शुभ माना जाता है। यदि किसी की जन्म कुंडली में सूर्य और बुध दशम भाव में हैं और राहु और मंगल षष्ठम भाव में हैं तो राज योग बनता है। इस राज योग के चलते व्यक्ति को समाज में बहुत मान-सम्मान प्राप्त होता है। जब चतुर्थ, पंचम, नवम और दशम भाव में कोई भी पाप ग्रह विराजमान नहीं होता तो, कुंडली में एक मजबूत राज योग का निर्माण होता है। बृहस्पति की चंद्रमा या मंगल से यदि युति हो रही है तो राज योग का निर्माण होता है। जब चतुर्थ, पंचम और सप्तम भाव के स्वामी केंद्र या लग्न में युति करते हैं तो इसे एक शुभ राज योग माना जाता है। यदि किसी जातक की कुंडली में लग्न, पंचम और नवम भाव के स्वामी ग्रह एक दूसरे के घरों में विराजमान हों तो ऐसे में राज योग का निर्माण होता है और ऐसा व्यक्ति राजा की जैसी जिंदगी जीता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली के एकादश भाव में बहुत सारे शुभ ग्रह विराजमान हों तो ऐसे में राज योग का निर्माण होता है। ऐसा व्यक्ति जीवन में सुख-सुविधाएं पाता है। जिस जातक की कुंडली में त्रिकोण के ग्रह अपने घर में हों या उच्च के हों तो यह स्थिति भी राज योग कहलाती है। ऐसा व्यक्ति धार्मिक प्रकृति का होता है और जीवन में काफी धन कमाता है। जिस जातक की कुंडली में त्रिकोण के ग्रह अपने घर में हों या उच्च के हों तो यह स्थिति भी राज योग कहलाती है। ऐसा व्यक्ति धार्मिक प्रकृति का होता है और जीवन में काफी धन कमाता है। बृहस्पति ग्रह यदि लग्न में चंद्रमा के साथ युति बना रहा हौ और कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत हो तो ऐसा व्यक्ति राजनीति के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त करता है।
0 votes
*ज्योतिष में कुछ महत्वपूर्ण योग विचार* : #रवि_योग : जन्म कुण्डली में निम्न ग्रह योग रवि योग बनाते हैं : * #वेषी_योग : सूर्य से द्वितीय भाव में चन्द्रमा के इलावा कोई भी ग्रह हो तो यह योग बनता है , ऐसा जातक कम भौतिक सुख के होते हुए भी प्रसन्न चित रहते हुए खुशी से रहता है । * #वोशी_योग : सूर्य से द्वादश भाव में चन्द्रमा के इलावा कोई भी ग्रह हो तो यह योग बनता है, ऐसा जातक अच्छा विद्यार्थी, दान - पुण्य करने वाला, किसी ना किसी गुण और कला के चलते प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला होता है । * #उभाचार्य_योग : सूर्य से द्वितीय और द्वादश भावो में चन्द्रमा के इलावा अन्य ग्रह हो तो यह योग बनता है, ऐसा जातक सभी तरह के भौतिक सुख सुविधाओं को भोगने वाला होता है । * #बुधादित्य_योग : सूर्य और बुध एक ही राशि में होने पर यह योग बनता है, ऐसा जातक अपने कार्यो में निपुण होता है , और बेहतर कार्यो की वजह से समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करता है , यह योग दशमांश कुण्डली में बन रहा हो तो बेहतर फल देता है । #चन्द्र_योग : जन्म कुण्डली में निम्न ग्रह योग चन्द्र योग बनाते हैं : * #सुफ़ना_योग : चन्द्रमा से द्वितीय भाव में सूर्य के इलावा कोई भी ग्रह हो तो यह योग होता है , ऐसा जातक अच्छी सोच समझ रखने वाला, सम्मानित , खुद से धनार्जन करने वाला होता है । * #अफना_योग : चन्द्रमा से द्वादश भाव में सूर्य के इलावा कोई भी ग्रह हो तो यह योग होता है, ऐसा जातक उच्च अधिकारी , रोग से रहित, भौतिक सुख भोगने वाला होता है । * #दुर्धरा_योग : चन्द्रमा से द्वितीय एवं द्वादश भावो में सूर्य के इलावा कोई भी ग्रह हो तो यह योग होता है, ऐसा जातक धनी, दान पुण्य करने वाला, सभी तरह के भौतिक सुख प्राप्त करने वाला होता है । * #केमद्रुम_योग : चन्द्रमा से युति कोई ग्रह ना करे और ना ही द्वितीय एवं द्वादश भावो में कोई ग्रह हो तो यह योग होता है , ऐसा जातक दुर्भाग्य , दरिद्र , असफलता से परेशान होता है । * #चंद्र_मंगल_योग : चंद्र मंगल युति होने पर यह योग होता है, ऐसा जातक भौतिक सुखों को प्राप्त करता है, धनी होता है लेकिन माता से कष्ट प्राप्त करता है । * #आदि_योग : चन्द्रमा से 6, 7, 8वे भाव में नैसर्गिक शुभ ग्रह होने पर यह योग बनता है, ऐसा जातक साहसी, जोखिम भरे कार्य करके सफलता प्राप्त करने वाला होता है । #महापुरुष_योग : ज्योतिष अनुसार निम्न 5 ग्रहों से बनने वाले योग को महापुरुष योग कहा जाता है : * #रूचक_योग : जन्म लग्न कुण्डली के केंद्र भाव ( 1, 4, 7, 10 ) में मंगल अपनी या उच्च राशि में हो तो यह योग होता है, ऐसा जातक विद्वान लोगो की संगत करने वाला, जोखिम भरे कार्य में भी सफल होने वाला, शत्रु पर विजय प्राप्त करने वाला , भाई एवं मित्रों से सुख प्राप्त करने वाला होता है । * #भद्र_योग : जन्म लग्न कुण्डली के केंद्र भाव ( 1, 4, 7, 10 ) में बुध अपनी या उच्च राशि में हो तो यह योग होता है, ऐसा जातक सगे संबंधी एवं मित्रों से सुख प्राप्त करने वाला, वाणी से दुसरों को प्रभावित करने वाला, धार्मिक एवं धनी होता है । * #शश_योग : जन्म लग्न कुण्डली के केंद्र भाव ( 1, 4, 7, 10 ) में शनि अपनी या उच्च राशि में हो तो यह योग होता है, ऐसा जातक दान पुण्य एवं परूपकार करते हुए सुख प्राप्त करने वाला, समाज भलाई के कार्य करने वाला, प्रकृति से प्रेम करने वाला, तकनीकी विषयो की शिक्षा प्राप्त करके सफल होता है । * #मालव्य_योग : जन्म लग्न कुण्डली के केंद्र भाव ( 1, 4, 7, 10 ) में शुक्र अपनी या उच्च राशि में हो तो यह योग होता है, ऐसा जातक कला में निपुण, भौतिक सुख भोगने वाला, अच्छे अच्छे वस्त्र एवं भोजन का भोग करने वाला होता है । * #हंस_योग : जन्म लग्न कुण्डली के केंद्र भाव ( 1, 4, 7, 10 ) में गुरु अपनी या उच्च राशि में हो तो यह योग होता है, ऐसा जातक समाज में सम्मानित, कार्यो में निपुण, विद्वान एवं धार्मिक होता है । #राज_योग : जन्म कुण्डली में निम्न ग्रह योग होने पर जातक राजा के समान सुख भोगता है : * लग्नेश एवं पंचमेश की युति साथ ही पुत्र कारक एवं आत्म कारक ग्रहो की युति हो तो राजयोग होता है , ऐसा जातक संतान प्राप्ति के बाद से तरक्की करता है , राजा एवं मंत्री पद को प्राप्त होता है राजसिक सुख भोगता है । * आत्म कारक ग्रह एवं भाग्येश की युति हो इन पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो भी राजयोग होता है । * द्वितीयेश, सुखेश , पंचमेश एवं आत्म कारक ग्रह शुभ ग्रह की राशि में हो तो राजयोग होता है । * त्रितयेश, षष्ठेश एवं आत्म कारक ग्रह अशुभ ग्रह की राशि में हो तो राजयोग होता है । * घटी लग्न एवं होरा लग्न का एक ही ग्रह के द्वारा दृष्ट होना राजयोग देता है । * घटी लग्न एवं होरा लग्न के स्वामी ग्रह अपनी / उच्च राशि में हो तो राजयोग होता है । * पंचमेश एवं भाग्येश की युति हो और शुभ ग्रहों से दृष्ट हो राजयोग देती है । * दशमेश चतुर्थ में , चतुर्थ का स्वामी ग्रह दसम भाव में हो , साथ में पंचमेश / भाग्येश से दृष्ट हो तो राजयोग होता है । * जन्म कुण्डली में 4 ग्रह उच्च या अपनी राशि में हो तो जातक राजा के समान सुख भोगता है । * जन्म कुण्डली के केंद्र भाव में शुभ ग्रह हो और 3, 6, 11वे भाव में अशुभ ग्रह हो तो भी राजयोग होता है । * पंचमेश 1, 4, 10वे भाव में हो एवं लग्नेश , भाग्येश से युति करे तो भी राजयोग होता है । * जन्म कुण्डली में चन्द्रमा बलि हो एवं वर्गोत्तम हो तो भी राजयोग होता है । #धन_योग : जन्म कुण्डली में निम्न ग्रह योग होने पर जातक धन संपदा के सुख भोगता है : * द्वितीयेश एवं लाभेश में राशि परिवर्तन योग होने पर धन योग होता है । * द्वितीयेश का संबंध 4 / 5 / 7/ 9 / 10वे भाव के स्वामी ग्रह से बने तो पारिवारिक धन संपदा से धनी होता है । * एकादश के स्वामी ग्रह का संबंध 4 / 5 / 7 / 9 / 10वे भाव के स्वामी ग्रह से बने तो खुद की आय से धनी होता है । * पंचमेश / भाग्येश के द्वितीय एवं एकादश भाव में होने पर धन योग होता है । * चतुर्थ / सप्तम / दसम के स्वामी ग्रह का द्वितीय एवं एकादश भाव में होने पर धन योग होता है । * चन्द्र / गुरु / शुक्र शुभ राशि के होकर द्वितीय एवं एकादश भावों से संबंधित हो तो भी धन योग होता है । #दरिद्र_योग : जन्म कुण्डली में निम्न ग्रह योग होने पर जातक गरीबी एवं दरिद्रता से पीड़ित होता है * लग्नेश का 6 / 8 / 12वे भाव में होकर मारक ग्रहो से संबंधित होना । * द्वितीयेश का 12वे भाव में पापी / मारक ग्रहों के बीच होना । * लग्नेश / सूर्य / चन्द्रमा का संबंध पापी / मारक ग्रहो से होना । * पंचमेश / भाग्येश का 6 / 8 / 12वे भाव में होकर मारक ग्रहो से संबंधित होना । * द्वितीय, चतुर्थ एवं एकादश भावों को नैसर्गिक अशुभ ( शनि, मंगल, राहु ) ग्रहों द्वारा देखा जाना । * पंचमेश एवं सप्तमेश का 6 / 8/ 12वे भावों में होकर अशुभ ग्रहों से दृष्ट होना । * भाग्येश एवं दशमेश का 6 / 8 / 12वे भावों में होकर अशुभ ग्रहों से दृष्ट होना ।
Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...