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कुंडली में 6th भाव से जाने बहुत सारी जानकारी

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जय श्री बालाजी षष्टम भाव। यह भाव सबसे ज्यादा रहष्य से भरा ही। त्रिक, तरी shad आयाश, उपचय भाव। क्या नाम दिया जाए इस भाव को। कर्म त्रिकोण में भी आये ये भाव। नवम भाव जो कि उच्च शिक्षया, लंबी यात्रा, पिता, स्वप्न, धर्म, उच्च कोटि की बुद्धि के भाव का दसम भाव भी है। काल पुरुष में बुध यानी कन्या । मंगल और शनि कारक इस भाव के। राहु यहाँ सबसे शुभ फल देता है यहाँ क्योंकि की काल पुरुष में कन्या राशि आती है जो कि राहु का अपना घर है। मतलब राहु महाराज यहाँ सबसे उत्तम फल यहां देते है मतलब कुछ न कुछ बात तो होगी ही इस भाव मे। कॉम्पिटिशन या प्रतियोगिता भी यही से निर्धारित होती है। लग्न का रोग, परिवार की विद्या या वाणी की विद्या या कर्म की विद्या की विद्या, पराक्रम का सुख, सुख का पराक्रम, विद्या का धन, जीवन साथ का नाश, मृत्यु से लाभ, धर्म का कर्म, कर्म का भाग्य, लाभ की मृत्यु, नाश का शत्रु। क्या इन सब के कारन यह भाव उच्च कोटि का है। इतनी सारी विशेषताओ के कारण। मंगल, शनि, राहु तीनो पाप ग्रह यहाँ प्रभाव दिखाते है। षष्टम भाव परिवार की योजनाओं का भाव है। परिवार की बुद्धि का भाव है। परिवार के लोग कितने बुद्धिमान होंगे वो यही से पता चलेगा। मंदिर जाने की सोचे कि न सोचें वो भी यही भाव बताएगा। खाने के बारे में क्या क्या ख्याल आते है वो भी यही भाव बताएगा। पराक्रम का कितना सुख मेगा यही भाव बताएगा। छोटे भाई बहनों का सुख कितना मिलेगा यही भाव बताएगा। हमारी शारीरिक ग्रोथ का सुख भी तो यही भाव बतावेगा। माता का पराक्रम। माता कितनी पराक्रमी होगी। जनता की वृद्धि। मतलब राजनेता ओर अभिनेता के लिए भी यह भाव बाहत ही महरत्वपूर्ण है। गाड़ी, जमीन , सुवह हमे कितना अधिक मिल सकता है यह भाव ही तो बताएगा। इनका व्रद्धि भलव जो है। बच्चो का धन कितना होगा। हमारी बुद्धि में कितने चांद रहेंगे। पूर्वजो से क्या धन मिला है। ग्लैमर का धन। मंत्रिपद से कितना धन मिलेगा। सांमने वाला हमे आसानी से पैसा देगा कि नही यही तो भलव बताएगा। कस्टमर आराम से देगा कि नही पैसा। उधार दिया पैसा आसानी से आएगा कि नही। बैंक से लोन आसानी से मिलेगा की नही यही भाव तो बताएगा। मृत्यु से कितना लाभ मिलेगा। lic, म्यूच्यूअल फण्ड। गड़े हुए धन से कितना लाभ मिलेगा यही भाव तो बताएगा। गुप्त ज्ञान से कितना लाभ मिलेगा। दीर्घ कालीन रोगों से कितना लाभ मिलेगा। पैतृक संपत्ति से कितना लाभ मिलेगा यही भाव तो तय करेगा। भाग्य का कितना कर्म है। ये भाव मे बैठे ग्रह ओर ये भाव हमारे भाग्य का निर्माण करेंगे। कर्म का तो भाग्य हो गया। नोकरी यही भाव तो तय करेगा। कर्म में कितय भाग्य लिखा है यही भाव तो तय करेगा। लाभ की मृत्य कैसे होगी यही भाव तो तय करेगा। इच्छया पूर्ति की मृत्यु यही भाव तो तय करेगा। मतलब इस भाव का भावेश लाभ के लिए बड़ा ही निकृष्ट है। ओर नाश का तो मारक भाव है। षष्टम भाव का चन्द्र वैसे तो देखा जाए तो 3 6 8 11 12 भावो में शुभ ग्रह थोड़ी बहुत पीड़ा तो देंगे ही। छह भाव दूसरा सबसे पापी भाव है जो क्रोध को नियंत्रण करता है। शत्रु पक्ष का है। षष्टम में बैठा चंदत बताएगा कि वैश्य समुदाय से शत्रु पक्ष बन सकते है। षष्टम का चन्दर बुद्धिमान भी बनाता है। क्यो क्योंकि बुद्धि का द्वितीय भाव है। और शुक्र जैसे अगले भाव की शुभ वृद्धि करता है वैसे ही चन्दर पिछले भाव की वृद्धि करता है। अब यहां पक्ष बल में हीं चन्दर पापी बन जायेगा और शुभ फल देगा ही। पक्ष बलि पूर्ण चन्दर शुभ का हो जाएगा तो अशुभ फल देगा। षष्टम भाव भोजन की योजना का है तो यहां बैठा चन्दर शनि या राहु से पीड़ित हुआ तो ज्यादते मामलों में जातक को शराबी वना देता है। बाकी तो कुंडली देखकर ही पता चलता है। 6 8 12 में बैठा चन्दर जातक को थोड़ा सा दर्पण भी बनाता है। बाकी अपनी कुंडली के हिसाब से विश्लेषण कर लो महेंद्र बाहुबली। छठे भाव का शुक्र शुक्र गुरु के बाद सबसे शुभ ग्रह। काल पुरुष में यहां नीच का। 6 भाव रोग का। 6 8 12 में कोई भी ग्रह हो थोड़ी बहुत परेशानी तो होगी ही। 6 ओर 8 में शारीरिक और मानसिक रोग। षष्टम का शुक्र निष्फल होगा। क्यो....क्योंकि अपने कारक भाव से 12 वे भाव मे होगा। जैसे सप्तम का शनि अष्टम के लिए निष्फल है लेकिन सप्तम के अहभ फलों में जोरदार व्रद्धि करता है। इसी तरह षष्टम का शुक्र सप्तम के लिए शुभ फलदायी नही होगा। लेकिन यहां भी शुक्र उतना तकिल्फ़ नही देगा क्योंकि किसी भी भाव से 12वे भाव मे शुक्र अपने अगले भाव की व्रद्धि करता है। तो यहां 6 का शुक्र सप्तम के लिए थोड़ा सा पीड़ा दाई हो सकता है। शुक्र से सम्बंधीत बीमारी हो सकती है। बैद्यनाथ के अनुसार 3 4 6 12 में शुक्र शुभ बलि ओर राजयोग देता है। 6 भाव का शुक्र जीवन साथी के 12 भाव मे होगा और आपके 12 भलव पे शुभ दृष्टि डालेगा तो ये भी एक प्रबल राजयोग बन गया। शुभ ग्रह विद्यमान हो या शुभ ग्रह की दृष्टि हो या शुभ ग्रह के नक्षत्र, ननवांश, राशि हो एक ही बात है। आपकी बुद्धि में चार चांद लगाएगा षष्टम का शुक्र। माता जी बन ठन के रहेगी। ज्योतिषी भी हो सकती है। छोटा भाई के पास सुख। घर। मकान गाड़ी हो सकती है। गायक हो सकता है छोटा भाई। आपकी भावनात्मक इच्छयाये प्रबल हो सकती है। पिताजी डॉक्टर। लक्ज़री व्ययवस्य करने वाले। होटल। सॉफ्टवेयर engg हो सकते है। पूर्व जन्म में आप बड़े सम्मानित व्यक्ति हो सकते है। बड़े भाई बहन को पैतृक संपत्ति मिल सकती है। कोई मूत्र के रोग हो सकते है उनको। बड़ी बहन को यूटरस का रोग हो सकता है। परिवार वाले ग्लैमर पसंद लोग हो सकते है। परिवार में कई लोग ज्योतिषी हो सकते है। परिवार के लोग उच्च कोटि की बुद्धि के लोग हो सकते है। तो इस तरह षष्टम का शुक्र बाहत तरह के फल देगा। बाकी तो कुंडली की स्थिति और शुक्र की अवस्था। स्थिति। बल। षडवर्ग बल की स्थिति से पता चलेगा। छठे भाव का गुरु 6 भाव रोग, ऋण, शत्रु, सेवक, नोकरी, कॉम्पिटिशन, पूर्व जन्म के कर्म, अर्थ त्रिकोण, रोग प्रतिरोधक क्षमता आदि का है। गुरु स्थान हानि करता है। मतलब रोग ऋण शत्रु की हानि करेगा। मतलब रोग को खत्म करेगा। ऋण को खत्म करेगा। शत्रु को खत्म करेगा। यही गुरु दसम पे दृष्टि डाल के कर्म भाव को हष्ट पुष्ट करेगा। यही गुरु वाणी भाव पे दृष्टि डाल के वाक सिद्धि देगा। ज्ञान युक्त वाणी देगा। आपके काम का पूरा ज्ञान देगा। ज्योतिष की विद्या देगा क्योंकि द्वितीय भाव तो आकाश की विद्या का भाव जो जी। आकाश की योजना का भाव जो है। परिवार का भाव जो है। मतलब गुरु अर्थ त्रिकोण को शुभ फल देगा। यही गुरु बताएगा कि पिछले जन्म में आप मार्गदर्शक थे। गुरु थे। कोषाध्यक्ष थे। राजगुरु थे पिछले जन्म में। इसी जन्म में भी शायद आप टीचर हो सरकारी। मतलब पिछले जन्म में भी टीचर इस जन्म में भी टीचर। मार्गदर्शक। गुरु। भले ही यहां गुरु अच्छा फल देगा लेकिन गुरु केंद्र या त्रिकोण का अधिपति होकर बैठ गया तो उन भावो को तो नुकसान या तकिल्फ़ देगा ही। क्योंकि केन्द्राधिपति दोष से भी पीड़ित होगा और शुभ भावो का स्वामी होकर असगुभ में बैठ गया तो उन भावो को तो दिक्कत देगा ही भले ही अर्थ त्रिकोण के लिए शुभ फल दाई है

References

6tth house, horoscope
posted Mar 5 by Yadunandan Goswami

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बहुत अच्छा विश्लेषण, ज्ञान की वृद्धि हुई.. आभार

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कुंडली के नवम भाव में लग्नेश का प्रभाव कुंडली के नवम भाव में लग्नेश का प्रभाव 1)कुंडली के नवम भाव में लग्नेश का प्रभाव जानने के लिए सर्वप्रथम हम प्रथम भाव और नवम भाव के नैसर्गिक कारक के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करेंगे। 2) नवम भाव भाग्य का कारक भाव है। यदि लग्नेश नवम भाव में स्थित हो तब जातक जन्म से ही भाग्यशाली होता है। जातक धनी और समृद्ध व्यक्ति होता है। जातक के जीवन के प्रति प्रैक्टिकल एप्रोच होता है। जातक सांसारिक सुख सुविधाओं की ओर झुकाव रखने वाला व्यक्ति होता है। जातक दयालु और दूसरों की रक्षा करने वाला व्यक्ति होता है। जातक की संवाद का तरीका उत्तम होता है। 3) नवम भाव धर्म त्रिकोना होता है। यदि लग्नेश नवम भाव में हो तो जातक धार्मिक प्रवृत्ति का होता है। जातक धार्मिक क्रियाकलापों के प्रति एक्टिव होता है। जातक मंदिर निर्माण, धर्मशाला का निर्माण, मंदिर के रखरखाव या किसी दूसरे धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाता है। जातक धार्मिक व्यक्तियों से संबंध रखने वाला व्यक्ति होता है। जातक एक अच्छा रिलीजियस स्पीकर या वक्ता हो सकता है। 4) नवम भाव मंत्र शक्ति और यंत्र शक्ति से भी संबंधित होता है। अतः नवम भाव में स्थित लग्नेश जातक को मंत्रों या यंत्रों को सिद्ध करने की क्षमता देता है। जातक की क्षमता जातक की कुंडली पर निर्भर करेगी। 5) नवम भाव प्रसिद्धि का कारक भाव है। नवम भाव में स्थित लग्नेश जातक को अच्छी प्रसिद्धि दिलाती है। यह जातक की कुंडली के बल पर निर्भर करेगा कि जातक कितना ज्यादा नेम और फेम प्राप्त करेगा। यदि नवम भाव में स्थित लग्नेश शुभ ग्रहों के साथ संबंध बनाता है तब जातक निश्चित ही एक प्रसिद्ध व्यक्ति होगा। 6)नवम भाव पिता से संबंधित भाव है। नवम भाव में स्थित लग्नेश के कारण जातक अपने पिता का आदर और सम्मान करेगा। जातक के अपने पिता से उत्तम संबंध होंगे। यदि लग्नेश नवम भाव में सुस्थित हो तब जातक के पिता प्रसिद्ध और उत्तम व्यक्तित्व वाले व्यक्ति होंगे। जातक के पिता की ईश्वर पर अच्छी आस्था होगी। जातक के पिता की सामाजिक प्रतिष्ठा भी अच्छी होगी। जातक अपने पिता की संपत्ति को प्राप्त करेगा। 7) नवम भाव यात्रा का कारक भाव है। अतः लग्नेश नवम भाव में स्थित हो तब जातक की लंबी दूरी की यात्रा संभव होती है। जातक देश में या विदेश में बहुत सारी यात्राएं करेगा। 8)ज्योतिष के शास्त्रों के अनुसार यदि लग्नेश नवम भाव में स्थित हो तब जातक विष्णु का उपासक होता है। अगर हम इसके दूसरे पहलू के बारे में बात करें तो हम कह सकते हैं कि जातक पालनकर्ता की भूमिका में होगा। अर्थात जातक अपने समाज की, परिवार की, नगर की या देश की पालन करने में या भरण पोषण करने में उत्तम जिम्मेदारी निभाएगा। यह एक प्रकार से जातक की कर्तव्य परायण होने की सूचना देता है। 9)नवम भाव में स्थित लग्नेश यदि नवमेश के साथ स्थित हो तब यह एक उत्तम राजयोग बनाता है। जातक धनी और समृद्ध व्यक्ति होगा। जातक भाग्यशाली व्यक्ति होगा। जातक धार्मिक व्यक्ति होगा और धर्म के लिए बहुत सारे उत्तम कार्य करेगा। जातक धार्मिक यात्राएं करेगा। जातक अपने पिता और अपने गुरु की सेवा करेगा। जातक अपने पिता का सुख प्राप्त करेगा। जातक को अपने पैतृक संपत्ति का सुख प्राप्त होगा। Use app for consultation अपना जन्म दिनांक और समय भेजे अपने कुण्डली का वीशलेषण कराये
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कुण्डली का अष्टम भाव ( 8 हाउस) और शनि ********************* फलित ज्योतिष में कुंडली का आठवा भाव और शनि दोनों ही बड़े महत्वपूर्ण और चर्चित विषय हैं कुंडली में अष्टम भाव को मृत्यु, कारागार, यानी जेल दुर्घटना, बड़े संकट, आकस्मिक दुर्घटनाएं, शरीर कष्ट आदि का कारक होने से दुःख भाव या पाप भाव के रूप में देखा जाता है तो वहीँ शनि को – कर्म, आजीविका, जनता, सेवक, नौकरी, अनुशाशन, दूरदृष्टि, प्राचीन वस्तु, लोहा, स्टील, कोयला, पेट्रोल, पेट्रोलयम प्रोडक्ट, मशीन, औजार, तपश्या और अध्यात्म का करक मन गया है। स्वास्थ की दृष्टि से शनि हमारे पाचन–तंत्र, हड्डियों के जोड़, बाल, नाखून,और दांतों को भी नियंत्रित करता है। कुंडली में अष्टम भाव को पाप या दुःख भाव होने से अष्टम भाव में किसी भी ग्रह का होना अच्छा नहीं माना गया है इसमें भी विशेषकर पाप या उग्र ग्रह का अष्टम में होना अधिक समस्या कारक माना गया है कुंडली में कोई भी ग्रह अष्टम भाव में होने से वह ग्रह पीड़ित और कमजोर स्थिति में आ जाता है साथ ही स्वास्थ की दृष्टि से भी बहुत सी समस्याएं उत्पन्न होती हैं अब विशेष रूप से शनि की बात करें तो शनि का कुंडली के अष्टम भाव में होना निश्चित रूप से अच्छा नहीं है इससे जीवन में बहुत सी समस्याएं उत्पन्न होती हैं शनि के अष्टम भाव में होने को लेकर एक सकारात्मक बात यह तो है के कुंडली में अष्टम का शनि व्यक्ति को दीर्घायु देता है यदि कुंडली में अन्य बहुत नकारात्मक योग न बने हुए हों तो अष्टम भाव में स्थित शनि व्यक्ति की आयु को दीर्घ कर देता है पर इसके अलावा शनि अष्टम में होने से बहुत सी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यदि शनि कुंडली के आठवे भाव में स्थित हो तो ऐसे में व्यक्ति को पाचन तन्त्र और पेट से जुडी समस्याएं लगी ही रहती हैं इसके अलावा जोड़ो का दर्द, दाँतों तथा नाखूनों से जुडी समस्याएं भी अक्सर परेशान करती हैं, शनि का कुंडली के अष्टम भाव में होना व्यक्ति की आजीविका या करियर को भी अक्सर बाधित करता है करियर को लेकर कभी कभी संघर्ष की स्थिति बनी रहती है करियर में स्थिरता नहीं आ पाती और मेहनत करने पर भी व्यक्ति को अपनी प्रोफेशनल लाइफ में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते जो लोग राजनैतिक क्षेत्र में आगे जान चाहते हैं उनके लिए भी अष्टम भाव का शनि संघर्ष उत्पन्न करता है वैसे राजनीति और सत्ता का सीधा कारक सूर्य को माना गया है पर शनि जनता और जनसमर्थन का कारक होता है इस कारण राजनैतिक सफलता में शनि की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होती है कुंडली में शनि अष्टम भाव में होने से व्यक्ति को जनता का अच्छा सहयोग और जनसमर्थन नहीं मिल पाता जिससे व्यक्ति सीधे चुनावी राजनीती में सफल नहीं हो पाता या बहुत संघर्ष का सामना करना पड़ता है शनि अष्टम में होने से व्यक्ति को अपने कार्यों के लिए अच्छे एम्पलॉयज या सर्वेंट नहीं मिल पाते यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बिजनेस या व्यापार में सफलता के अच्छे योग हों पर शनि कुंडली के अष्टम भाव में हो तो ऐसे में लोहा, स्टील, काँच, पुर्जे, पेंट्स, केमिकल प्रोडक्ट्स, पेट्रोल आदि का कार्य नहीं करना चाहिए क्योंकि ये सभी वस्तुएं शनि के ही अंतर्गत आती हैं और अष्टम में शनि होने पर इन क्षेत्रों में किया गया इन्वेस्टमेंट लाभदायक नहीं होता हानि की अधिक संभावनाएं रहती हैं यदि शनि कुंडली के अष्टम भाव में हो तो ऐसे में शनि दशा स्वास्थ कष्ट और संघर्ष उत्पन्न करने वाली होती है। अष्टम में शनि होना किसी भी स्थिति में शुभ तो नहीं है पर यदि यहाँ स्व उच्च राशि में हो या बृहस्पति से दृष्ट हो तो समस्याएं बड़ा रूप नहीं लेती और उनका समाधान होता रहता है। यदि शनि कुंडली के अष्टम भाव में होने से ये समस्याएं उत्पन्न हो रही हों तो निम्नलिखित उपाय करना लाभदायक होगा। 1.रोज़ ॐ शम शनैश्चराय नमः का जप करें। 2. साबुत उड़द का दान करें। 3. शनिवार को पीपल पर सरसों के तेल का दिया जलायें। ।। श्री हनुमते नमः ।।. ॐ शनिदेवाय नमः
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पंचम भाव– जन्म कुंडली में पंचम भाव मुख्य रूप से संतान और ज्ञान का भाव होता है। ऋषि पाराशर के अनुसार इसे सीखने के भाव के तौर पर भी देखा जाता है। यह भाव किसी भी बात को ग्रहण करने की मानसिक क्षमता को दर्शाता है कि, कैसे आप आसानी से किसी विषय के बारे में जान सकते हैं। पंचम भाव गुणात्मक संभावनाओं को भी प्रकट करता है। कुंडली में पंचम भाव को निम्न प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है। सम्राट की निशानी, कर, बुद्धि, बच्चे, पुत्र, पेट, वैदिक ज्ञान, पारंपरिक कानून, पूर्व में किये गये पुण्य कर्म कुंडली में पंचम भाव से क्या देखा जाता है बुद्धिमता, लगाव, आत्मन बच्चे, प्रसिद्धि, संचित कर्म पद का बोध पंचम भाव से लगाया जाता है ज्योतिष विद्या से संबंधित पुस्तकों में पंचम भाव प्रश्नज्ञान में भट्टोत्पल कहते हैं कि मंत्रों का उच्चारण या धार्मिक भजन, आध्यात्मिक गतिविधियां, बुद्धिमता और साहित्यिक रचनाएँ पंचम भाव से प्रभावित होती हैं। पंचम भाव प्रथम संतान की उत्पत्ति, खुशियां, समाज और सामाजिक झुकाव का प्रतिनिधित्व करता है। यह भाव स्वाद और प्रशंसा, कलात्मक गुण, नाट्य रुपांतरण, मनोरंजन, हॉल और पार्टी, रोमांस, प्यार, प्रेम प्रसंग, सिनेमा, मनोरंजन का स्थान, रंगमंच आदि को दर्शाता है। यह भाव सभी प्रकार की वस्तुओं और भौतिक सुखों जैसे- खेल, ओपेरा, ड्रामा, संगीत, नृत्य और मनोरंजन को दर्शाता है। उत्तर कालामृत के अनुसार पंचम भाव कुंडली में एक महत्वपूर्ण भाव होता है क्योंकि यह उच्च नैतिक मूल्य, मैकेनिकल आर्ट, विवेक, पुण्य और पाप के बीच भेदभाव, मंत्रों के द्वारा प्रार्थना, वैदिक मंत्र और गीतों का उच्चारण, धार्मिक प्रवृत्ति, गहरी सोच, गहन शिक्षा और ज्ञान, विरासत में मिला उच्च पद, साहित्यिक रचना, त्यौहार, संतुष्टि, पैतृक संपत्ति, वेश्या के साथ संबंध और चावल से निर्मित उपहार को दर्शाता है। ऋषि पाराशर के अनुसार, पंचम भाव, दशम भाव से अष्टम पर स्थित होता है इसलिए पंचम भाव उच्च पद और प्रतिष्ठा में गिरावट को दर्शाता है। इससे पूर्व जन्म में किये जाने वाले पुण्य कर्मों का पता चलता है। यह भाव प्राणायाम, आध्यात्मिक कार्य, मंत्र-यंत्र, इष्ट देवता, शिष्य और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए आमंत्रण को दर्शाता है। यह भाव मानसिक चेतना से आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति को प्रकट करता है। काल पुरुष कुंडली में पंचम भाव पर सिंह राशि का नियंत्रण रहता है और इसका स्वामी सूर्य है। पंचम भाव की विशेषताएँ पंचम भाव विशेष विषयों में उच्च शिक्षा, फैलोशिप, पोस्ट ग्रेजुएशन, लेखन, पढ़ना, वाद-विवाद, रिसर्च, मानसिक खोज और कौशल को दर्शाता है। इस भाव से सट्टेबाजी में होने वाले लाभ, शेयर बाजार, जुआ, मैच फिक्सिंग और लॉटरी से जुड़े मामलों को भी देखा जाता है। पंचम भाव के संबंध में जातक परिजात में उल्लेख मिलता है कि यह बुद्धिमता, पुत्र, धर्म, शासक या राजा को दर्शाता है। तीर्थयात्रा को द्वितीय, पंचम, सप्तम और एकादश भाव से देखा जाता है। पंचम भाव प्रेम-प्रसंग, किस प्रेम-प्रसंग में सफलता मिलेगी, लाइसेंस, वैध और तर्कसंगत आकर्षण, बलात्कार, अपहरण आदि को दर्शाता है। यह भाव दो लोगों के बीच शारीरिक और चुंबकीय व्यक्तित्व को आकर्षित करता है। यह भाव पेट की चर्बी और ह्रदय का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा यह दायें गाल, ह्रदय का दायां भाग या दायें घुटने को भी दर्शाता है। मेदिनी ज्योतिष में पंचम भाव बुद्धिमता, संवेदना की स्थिरता, सांप्रदायिक सौहार्द, लोगों में सट्टेबाजी की प्रवृत्ति, निवेश, स्टॉक एक्सचेंज, बच्चे, आबादी, विश्वविद्यालय, लोगों के नैतिक मूल्य आदि बातों को दर्शाता है। यह भाव जन्म दर और उससे संबंधित रुचि, मनोरंजन स्थल, सिनेमा, रंगमंच, कला, स्पोर्ट्स, सभी प्रकार के मनोरंजन और खुशियों को प्रदर्शित करता है। यह भाव राजदूत, सरकार के प्रतिनिधि और विदेशों में स्थित राजनयिकों पर शासन करता है। यह मानव संसाधन मंत्रालय, शिक्षा, स्कूल, संभावनाओं पर आधारित देश की अर्थव्यवस्था, लोगों की खुशियां या दुःख, शिक्षा से संबंधित सुविधाएँ, कला और देश की कलात्मक रचना आदि का बोध कराता है। पंचम भाव का कुंडली के अन्य भावों से अंतर्संबंध पंचम भाव का कुंडली के अन्य भावों से अंतर्संबंध हो सकता है। जैसे कि पंचम भाव संतान, कला, मीडिया, सृजनात्मकता, रंगमंच प्रस्तुति, सिनेमा, मनोरंजन से संंबंधित अन्य साधन, रोमांस और अस्थाई आश्रय या निवास से संबंधित होता है। पंचम भाव चतुर्थ भाव से द्वितीय स्थान पर होता है। तृतीय भाव हमारे अहंकार, अपरिपक्व व्यवहार और सोचने-समझने की शक्ति व ज्ञान को दर्शाता है लेकिन असल में इनका निर्धारण कुंडली में पंचम भाव से होता है। पंचम भाव उन बिन्दुओं को दर्शाता है, जिनसे जीवन में आप कुछ सीखते हैं। चतुर्थ भाव शुरुआती शिक्षा का कारक होता है, यह प्राथमिक शिक्षा, निवास और भवन को दर्शाता है। पंचम भाव गणित, विज्ञान, कला आदि से संबंधित होता है। इससे तात्पर्य है कि आप किस विषय में विशेषज्ञता प्राप्त करेंगे। शेयर बाजार, सट्टे से लाभ, सिनेमा, अचानक होने वाला धन लाभ और हानि कुंडली में पंचम भाव से देखा जाता है। पंचम भाव राजनीति, मंत्री, मातृ भूमि से लाभ की प्राप्ति, स्थाई और पारिवारिक संपत्ति को दर्शाता है। आपके पास कितना धन होगा यह कुंडली में चतुर्थ भाव से देखा जाता है। वहीं आपके परिवार के पास कितना धन होगा यह पंचम भाव से जाना जाता है। पंचम भाव बुद्धिमता, अहंकार और आपके बड़े भाई-बहनों की संवाद क्षमता को दर्शाता है। आपकी माता का धन और उन्हें होने वाले लाभ, बच्चों से जुड़े खर्च, आपके जीवनसाथी और भाई-बहनों की इच्छा व उन्हें प्राप्त होने वाले लाभ का बोध भी पंचम भाव से होता है। यह भाव अंतर्ज्ञान और जीवनसाथी के परिवार की छवि के प्रभाव को भी दर्शाता है। यह भाव धर्म, दर्शन, धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं का सबसे उच्च भाव है। यह दर्शाता है कि आपके पिता और गुरु से आप किस प्रकार ज्ञान प्राप्त करेंगे। ज्योतिष शास्त्र की पुस्तकों में पंचम भाव कर्म या नौकरी का अंत और शुरुआत को दर्शाता है। इसका मतलब है कि आप नौकरी खो देंगे और आपको नई नौकरी मिलेगी या जॉब के लिए नये अवसर मिलेंगे। पंचम भाव बॉस की गुप्त संपत्तियाँ, इच्छाओं का अंत, बड़े भाई-बहनों के जीवनसाथी, दादी की सेहत, मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति की राह में आने वाली कठिनाइयों को दर्शाता है।
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चतुर्थ भाव– जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव को प्रसन्नता या सुख का भाव कहा जाता है। इसे माता के भाव के तौर पर भी जाना जाता है। यह भाव आपके निजी जीवन, घर में आपकी छवि, माता के साथ आपके संबंध, परिवार के अन्य सदस्यों के साथ आपके संबंध, आपकी सुख-सुविधाएँ और स्कूली व शुरुआती शिक्षा से संबंधित होता है। चतुर्थ भाव का महत्व और विशेषताएँ चतुर्थ भाव मानसिक शांति, पारिवारिक जीवन, निजी रिश्तेदार, घर, समृद्धि, उल्लास, सुविधाएँ, जमीन और पैतृक संपत्ति, छोटी-छोटी खुशियां, शिक्षा, वाहन और गर्दन व कंधों से संबंध रखता है। ज्योतिष में चतुर्थ भाव से क्या देखा जाता है? माता सुख-सुविधा वाहन अचल संपत्ति घर चतुर्थ भाव को लेकर ज्योतिषीय व्याख्या प्रसन्नज्ञान में भट्टोत्पल कहते हैं कि मूल्यवान जड़ी-बूटी, खजाना, छिद्र और गुफाओं को दर्शाता है। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार, चतुर्थ भाव माता का भाव होता है। यह भाव घर, निवास, पारिवारिक जीवन और व्यक्ति के सामान्य जीवन को दर्शाता है। यह भाव घर-परिवार से जुड़ी गुप्त बातों का बोध कराता है। काल पुरुष कुंडली में चतुर्थ भाव पर कर्क राशि का नियंत्रण रहता है और इस राशि का स्वामी ग्रह चंद्रमा होता है। उत्तर-कालामृत में कालिदास कहते हैं चतुर्थ भाव माता, तेल, स्नान, रिश्ते, जाति, वाहन, छोटी नाव, कुएँ, पानी, दूध, गाय, भैंस, मक्का और वृद्धि आदि को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त आर्द्र भूमि में उत्पादन, दवाई, विश्वास, झूठे आरोप, तंबू, तालाब की खुदाई या जन कल्याण के लिए इसका इस्तेमाल, हवेली, कला, घर में मनोरंजन, पैतृक संपत्ति, चोरी हुई संपत्ति का पता लगाने की कला, वैदिक और पवित्र ग्रन्थों का विकास आदि। चतुर्थ भाव जमीन या अचल संपत्ति को भी दर्शाता है, साथ ही किराये या लीज पर ली गई जमीन या वस्तुएँ। यह भाव वाहन सुख और अन्य व्यक्तियों के माध्यम से मिलने वाले वाहन सुख को भी प्रकट करता है। कुंडली में चतुर्थ भाव सभी प्रकार की संपत्ति को प्रभावित करता है (संपत्ति जैसे- क्षेत्र, चारागाह, रियल इस्टेट, खेत, बिल्डिंग, गार्डन, माइंस और स्मारक आदि) चतुर्थ भाव व्यक्ति की शिक्षा और शैक्षणिक योग्यता का बोध कराता है इसलिए इससे व्यक्ति की शुरुआती शिक्षा और कॉलेज की पढ़ाई के बारे में जाना जाता है। चतुर्थ भाव पैतृक घर जहां व्यक्ति का जन्म हुआ है, घर या जन्मभूमि से दूर जाने की संभावना, भूमिगत स्थान, प्राचीन स्मारक, आर्किटेक्चर, वाहन, घोड़े, हाथी और व्यक्ति का माँ के साथ संबंधों को दर्शाता है। चतुर्थ भाव सुख, विजय और आराम, पवित्र स्थान, नैतिक गुण, धार्मिक आचरण, स्तन, छाती, विद्रोह, मन, बुद्धिमता, व्यक्ति की योग्यता, हाई स्कूल और कॉलेज की शिक्षा आदि को व्यक्त करता है। मेदिनी ज्योतिष में चतुर्थ भाव राष्ट्र के प्राकृतिक संसाधन, माइंस, गार्डन, सार्वजनिक इमारतें, फसलें, कृषि, खनिज, जमीन, शांति, राजनीतिक स्थिरता, प्राकृतिक आपदाएँ, शैक्षणिक संस्थान, स्कूल, कॉलेज, कानून और व्यवस्था, घर व अन्य समुदायों से सद्भाव को दर्शाता है। इसे सिंहासन भाव भी कहा जाता है। इस भाव को राष्ट्र के लोगों के जीने की स्थिति, रियल इस्टेट, हाउसिंग, फार्मिंग और उत्पादन से भी जोड़कर देखा जाता है। यह भाव मातृभूमि, राष्ट्रवाद, झंडा और राजा के सिंहासन को भी दर्शाता है। इससे मौसम की स्थिति, ज्वालामुखी विस्फोट, भूकंप, बाढ़, सुनामी, भू-स्खलन, वनों में आग या अन्य प्राकृतिक आपदाओं को भी देखा जाता है। पश्चिमी ज्योतिष में चतुर्थ भाव का विचार कैबिनेट (मंत्रिमंडल) के तौर पर किया जाता है। वहीं वैदिक ज्योतिष में मंत्रिमंडल को प्रथम भाव से देखा जाता है। चतुर्थ भाव भौगोलिक मंत्रालय को भी दर्शाता है। यह किसी भी प्रकार सहमति या समझौते को निरस्त करने का निर्धारण भी करता है। चतुर्थ भाव का अन्य भावों से अंतर्संबंध चतुर्थ भाव का कुंडली के अन्य भावों से अंतर्संबंध हो सकता है। यह हमारे निजी जीवन या अफेयर को दर्शाता है, साथ ही आपके छोटे भाई-बहनों का धन, संचार में वृद्धि, यात्रा करने की क्षमता, वस्त्र, फर्नीचर, घर के अंदर की कलात्मक वस्तुएँ, कार, ऑर्किटेक्चर की पढ़ाई, पेशेवर और वाणिज्यिक स्थान को भी दर्शाता है। यह भाव निकटवर्ती रिश्ते और रिश्तेदारों के साथ संबंध व उनके घर आने का बोध कराता है। सामान्य रूप से यह सभी प्रकार के रिश्तों और रिश्तेदारों का प्रतिनिधित्व करता है, जो आपके घर आया करते हैं। छोटे भाई-बहनों के संसाधन, बच्चों को खोने का भय, आपके बच्चे कहां दान करते हैं, वह स्थान जहां वे धन दान करते हैं। यह सभी कुंडली में चतुर्थ भाव से देखा जाता है। चतुर्थ भाव विवाह के बाद आपके परिवार यानि बीवी और बच्चे आदि को दर्शाता है, साथ ही संयुक्त संपत्ति में आपका भाग्य, ससुराल पक्ष के लोगों का भाग्य, बिजनेस में की जाने वाली संभावनाओं से होने वाला नुकसान, आपके अंकल को होने वाला लाभ, कर्ज से मुक्ति, रोग और शत्रु, विरोधियों से होने वाला लाभ आदि का बोध होता है। चतुर्थ भाव आपके जीवनसाथी के करियर और प्रोफेशन का बोध भी कराता है। समाज में आपके जीवनसाथी की छवि या प्रतिष्ठा, आपके ससुराल पक्ष के लोगों के गुरु, ससुराल पक्ष के लोगों की शिक्षा और उनके द्वारा की जाने वाली लंबी दूरी की यात्राओं को भी व्यक्त करता है। चतुर्थ भाव आपके पिता और गुरु के जीवन में होने वाले बड़े परिवर्तन या मृत्यु, पिता की सर्जरी, धन के संबंध में पिता और गुरु से संबंधित गुप्त तथ्य, आपके नैतिक मूल्यों में होने वाले बड़े बदलाव, उच्च शिक्षा या लंबी यात्राओं को व्यक्त करता है। यह भाव आपके जीवनसाथी के अधिकारी और बॉस के साथ कानूनी साझेदारी का बोध भी कराता है। यह भाव स्वास्थ्य, कर्ज और बड़े भाई-बहनों के विरोधी, इच्छाओं की पूर्ति, कानूनी कार्रवाई शत्रुओं के माध्यम से पूरी होने वाली इच्छाओं को व्यक्त करता है। चतुर्थ भाव आध्यात्मिक ज्ञान के प्रति आपकी आस्था को दर्शाता है। आपके अंदर मौजूद संवेदना, संपत्ति को खरीदने या बेचने को लेकर आपके द्वारा किये जाने वाले प्रयासों का बोध कराता है। यदि किसी व्यक्ति का चतुर्थ भाव पीड़ित है तो उस व्यक्ति को यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिलने में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
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तृतीय भाव जन्म कुंडली में तृतीय भाव को वीरता और साहस का भाव कहा जाता है। यह हमारी संवाद शैली और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए किये जाने वाले प्रयासों को दर्शाता है। किसी भी तरह के कार्य को करने की इच्छाशक्ति का निर्धारण भी इस भाव से देखा जाता है। यह भाव आपके छोटे भाई-बहनों से भी संबंधित होता है। तृतीय भाव को विभिन्न माध्यमों से भी व्यक्त किया जाता है। धैर्य भाव: बुरे विचार, स्तन, कान, विशेषकर दायां कान, वीरता, पराक्रम, भाई-बहन, मानसिक शक्ति तृतीय भाव का महत्व और विशेषता तृतीय भाव भाई-बहन, बुद्धिमत्ता, पराक्रम, कम दूरी की यात्राएँ, पड़ोसी, नज़दीकी रिश्तेदार, पत्र और लेखन आदि का प्रतिनिधित्व करता है। तृतीय भाव से किसी भी व्यक्ति के साहस, पराक्रम, छोटे भाई-बहन, मित्र, धैर्य, लेखन, यात्रा और दायें कान का विचार किया जाता है। यह भाव दायें कान व स्तन, दृढता, वीरता और शौर्य को भी दर्शाता है। अष्टम भाव से अष्टम होने की वजह से तृतीय भाव जातक की आयु और चतुर्थ भाव से द्वादश होने के कारण माता की आयु का विचार भी इसी भाव से किया जाता है। ज्योतिष में तृतीय भाव से क्या देखा जाता है? पराक्रम छोटे भाई-बहन कम दूरी की यात्राएँ लेखन कला मित्रता आयु तृतीय भाव की ज्योतिषीय व्याख्या ‘सत्याचार्य’ के अनुसार किसी व्यक्ति की मानसिक शक्ति, दृढ़ संकल्प और भाषा के बारे में जानने के लिए यह भाव देखा जाता है। ‘सर्वार्थ चिन्तामणि’ के अनुसार, यह भाव कुंडली में किसी भी व्यक्ति के लिए दवाई, मित्र, शिक्षा और कम दूरी की यात्राओं को दर्शाता है। ‘ऋषि पाराशर’ ने तृतीय भाव की व्याख्या करते हुए लिखा है कि, यह साहस और वीरता का भाव है। यह हमारी मानसिक क्षमता व स्थिरता, याददाशत और दिमागी प्रवृत्ति आदि को व्यक्त करता है। यह भाव मुख्य रूप से शिक्षा या ज्ञान प्राप्ति के लिए किये गये प्रयासों व झुकाव को दर्शाता है। काल पुरुष कुंडली में तृतीय भाव पर मिथुन राशि का नियंत्रण रहता है और इसका स्वामी बुध ग्रह होता है। तृतीय भाव छोटे भाई-बहन, कजिन, प्रियजन, कर्ज से मुक्ति और पड़ोसियों के बारे में बताता है। सहज स्थान होने की वजह से यह भाव व्यक्ति को मिलने वाली मदद और अपने कार्य को पूरा करने के लिए मिलने वाली सहायता को दर्शाता है। उत्तर कालामृत में कालिदास कहते हैं कि तृतीय भाव युद्ध, सड़क के किनारे वाला स्थान, मानसिक भ्रम की स्थिति, दुःख, सैनिक, कंठ, भोजन, कान, शुद्ध भोजन, संपत्ति का विभाजन, अंगुली और अंगूठे के बीच का स्थान, महिला सेवक, छोटे वाहन की यात्रा और धर्म को लेकर प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी को दर्शाता है। ‘जातक परिजात’ में कहा गया है कि, तृतीय भाव छोटे भाई-बहनों के कल्याण, प्रतिष्ठान, कान, चुनिंदा गहने, वस्त्र, स्थिरता, वीरता, शक्ति, जड़ युक्त खाद्य पदार्थ और फल आदि को दर्शाता है। तृतीय भाव साहस, छोटी दूरी की यात्रा (साइकिल, ट्रेन, नदी, झील और वायु मार्ग के माध्यम से) का संकेत करता है। यह सभी प्रकार के पत्राचार, लेखन, अकाउंटिंग, गणित, समाचार, संचार के माध्यम जैसे- पोस्ट ऑफिस, लेटर बॉक्स, टेलीफोन, टेलीग्राफ, टेलीप्रिंट, टेलीविजन, टेली कम्युनिकेशन, रेडियो, रिपोर्ट, सिग्नल, एयर मेल आदि का प्रतिनिधित्व करता है। तृतीय भाव किताब और प्रकाशन से संबंधित भी होता है, अतः इस भाव के प्रभाव से कोई भी व्यक्ति भविष्य में संपादक, रिपोर्टर, सूचना अधिकारी और पत्रकार बन सकता है। यह भाव निवास परिवर्तन, बेचैनी, बदलाव और परिवर्तन, पुस्तकालय, बुक स्टोर, भाव-राव, हस्ताक्षर (कॉन्ट्रेक्ट या समझौते पर) मध्यस्थता आदि का कारक भी होता है। इसके अलावा यह भाव हाथ, बांह, श्वसन और तंत्रिका तंत्र को भी दर्शाता है। मेदिनी ज्योतिष के अनुसार तृतीय भाव परिवहन, टेलीकम्युनिकेशन, पोस्टल सर्विसेज, पड़ोसी देश और अन्य देशों के साथ संधियों को व्यक्त करता है। वहीं नाड़ी ज्योतिष के अनुसार तृतीय भाव जातक के माता-पिता के पुनर्विवाह को भी दर्शाता है, यदि तृतीय भाव में एक से ज्यादा ग्रह स्थित हों। प्रश्न ज्योतिष के अनुसार तृतीय भाव संचार के सभी माध्यमों को दर्शाता है। चाहे वह पत्र, पोस्टल डिलीवरी, टेलीफोन, फैक्स या इंटरनेट हो। तृतीय भाव का अन्य भावों से अंतर्संबंध वैदिक ज्योतिष में तृतीय भाव का संबंध संचार, संवाद, हाथों की मूवमेंट, शारीरिक पुष्टता, स्वयं के द्वारा की जाने वाली लंबी दूरी की यात्रा को दर्शाता है। यदि आप कोई काम अपने हाथों में लेकर उसे पूरा करते हैं, तो इसका बोध कुंडली में तृतीय भाव के माध्यम से किया जाता है। यह ड्राइविंग, कला, मीडिया, एंटरटेनमेंट, रोड, लेखन और आदेश, जो आप अपने नजदीकी रिश्तेदार या भाई-बहनों को संदेश के रूप में देते हैं। किसी भी कार्य को करने की क्षमता या यात्रा के बारे में तृतीय भाव से देखा जाता है। यह भाव धन बढ़ोत्तरी के लिए किये जाने वाले प्रयासों को भी दर्शाता है। यह माता का भाव भी होता है। यद्यपि चतुर्थ भाव माता का प्रतिनिधित्व करता है इसलिए कुंडली में तृतीय भाव से भी माता के संबंध में अध्ययन किया जाता है। यह भाव जीवन में खुशियों का अभाव या घर की खुशियों की कमी को भी दर्शाता है। यह आशा, कामना और बच्चों की इच्छा (विशेषकर पहली संतान), वृद्धि, सफलता, बच्चों को मिलने वाले पुरस्कार, जॉब, करियर, प्रशासनिक सेवा, बच्चों का व्यावसायिक लोन, वीरता और शत्रुओं से सामना करने का साहस, धर्म, गुरुजन और जीवनसाथी के सलाहकार को भी दर्शाता है। तृतीय भाव बड़े परिवर्तन और ससुराल पक्ष में किसी की मृत्यु का बोध भी कराता है। यह अष्टम भाव से अष्टम पर स्थित होता है इसलिए मृत्यु जैसे विषयों का अनुभव कराता है। यह आपके जीवनसाथी के गुरु और जीवनसाथी के पिता का बोध भी कराता है। यह भाव कर्ज, बीमारी, आपके बड़े भाई-बहनों के बच्चे, आध्यात्मिक कर्मों के संचय को भी दर्शाता है। क्या आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी, क्या आप विदेश यात्रा पर जाएंगे, क्या आप अस्पताल में भर्ती होंगे आदि ये सभी बाते तृतीय भाव द्वारा व्यक्त की जाती है।
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