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होलिका पर्व मार्च 28 विशेष*

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*होलिका पर्व मार्च 28 विशेष* 〰️〰️

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Holi festival
posted Mar 28 by Pooja Bhatia

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दृष्टिहीन मार्किट में बहुत मंदी का दौर जारी है लेकिन 22मार्च को मकर राशि में मंगल ग्रह का प्रवेश देगा नया उत्साह , सोमवार से शुरू होगी तेजी , ज्योतिष शास्त्र में भारत की जनता को विश्वाश है , करोना का डर होगा ख़तम , आने वाले समय में गुरु का धनु राशि में प्रवेश सूर्य का मेष राशि में प्रवेश भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और एक बार फिर सभी पेपर में उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य के अंदर से सुख देने वाली खबरें आती रहेगी , जब मंगल प्रभावी होता है तो राहु का असर कम होता है जबकि माना जा रहा है कि जो आज यह करो ना का वायरस या इस प्रकार के जो अनजान बीमारी राहु के ज्यादा प्रभावशाली होने से जगत व्याप्त है तो ऐसे में मंगल का मजबूत होना इस भयानक बीमारी से मुक्ति देगा एवं जीवन सामान्य तौर पर पटरी पर आ जाएगा तो सभी पढ़ने वाले साथी इस विश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ेंगे
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13.हस्त (Delta Carvi)

इस नक्षत्र में पांच तारे हैं जो हाथ के पंजे की आकृति के समान दिखाई देते हैं। तिर्यकमुखी तथा लघु प्रकृति वाले हस्त नक्षत्र के स्वामी सूर्यदेव हैं। 

इस नक्षत्र को लक्ष्मीदायी अर्थात् सौभाग्य देने वाला माना गया है। इस नक्षत्र को व्यापार, वाणिज्य तथा यज्ञ, हवन आदि के लिए विशेष 

फलदायी माना गया है परन्तु इस नक्षत्र में विवाह तथा अन्य समस्त धर्मकार्य भी किए जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब 

सूर्य हस्त नक्षत्र में हो तब यदि वर्षा होती है, उस समय फसल बहुत अच्छी होती है।

14.चित्रा (Spica)

अन्य नक्षत्रों के समान चित्रा अनेक तारों का समूह पुंज न होकर अकेला तारा है जो मोती जैसा चमकता है। इसके स्वामी त्वष्टा है। 

यह मृदु, मैत्री स्वभाव वाला तिर्यकमुखी नक्षत्र है। इस नक्षत्र को शुभ मानकर इसमें साझेदारी का व्यापार आरंभ करना, मैत्री संबंध बनाना, 

विवाह करना, राजनैतिक संबंध बनाना आदि कार्यों को करने की आज्ञा दी गई है।

15.स्वाति (Alpha Bootes)

यह नक्षत्र एक गणतारा प्रवाल सदृश है जिसके स्वामी वायुदेव हैं। यह तिर्यकमुखी चर नक्षत्र है तथा इसे विवाह नक्षत्रों में प्रमुख माना जाता है। 

स्वाति नक्षत्र में होने वाली वर्षा फसलों के लिए अमृत के समान मानी गई है। इस नक्षत्र में विवाह के अतिरिक्त यात्रा संबंधी, वाहनों का 

क्रय-विक्रय, प्रिटिंग संबंधी कार्य शुभ माने गए हैं।

16.विशाखा (Alpha Librae)

चार तारों के समूह से बना विशाखा नक्षत्र अधोमुखी, मिश्र तथा साधारण प्रकृति का माना गया है। इसके स्वामी इन्द्राग्नि है। 

इस नक्षत्र में अग्नि संबंधी सभी कार्य करना उत्तम बताया गया है। इस नक्षत्र में विद्युत तथा दूरसंचार संबंधी कार्य आरंभ करने पर 

सफलता मिलती है।

17.अनुराधा (Delta Scorpii)

इस नक्षत्र में चार या छह तारे रथ के आकार सदृश दिखाई देते हैं। यह मैत्रीसंज्ञक नक्षत्र है जिसे विवाह के लिए अति उत्तम बताया गया है। 

इस नक्षत्र में विवाह के अतिरिक्त सुगंधित पदार्थों का व्यवसाय, हाथी, घोड़ी, ऊंट अथवा वाहन संबंधी कार्य भी किए जा सकते हैं। 

अनुराधा नक्षत्र में चिकित्सा कार्य, सर्जरी आदि करने से रोगी के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।

18.ज्येष्ठा (Alpha Scorpii)

ज्येष्ठा गण्डान्त का नक्षत्र है जिसके स्वामी इन्द्र हैं। इस नक्षत्र के अंत की तीन घटियां दोषपूर्ण होती है जबकि चतुर्थ चरण में किसी भी 

शुभ कार्य को करने के निषेधाज्ञा है। ज्येष्ठा नक्षत्र को राज्याभिषेक, पदग्रहण, शपथग्रहण, शासकीय कर्मचारियों की नियुक्ति हेतु उत्तम 

माना गया है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक के लिए गण्डान्त दोष हेतु शांतिकर्म करवाना चाहिए।

19.मूल (Lambda Saggittarii)

इस नक्षत्र में ग्यारह या बारह तारे माने जाते हैं। यह भी गण्डान्त नक्षत्र है जिसका स्वामी निर्ऋति नामक राक्षस है।

 इस नक्षत्र में विवाह के अतिरिक्त अन्य सभी शुभ कार्यों को करने की मनाही है। परन्तु इस नक्षत्र में उग्र व क्रूर कार्य तथा अस्त्र-शस्त्रों 

का अभ्यास आदि किए जा सकते हैं। मूल नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक के लिए शांति का अनुष्ठान करवाना चाहिए।

20.पूर्वाषाढ़ा (Delta Saggittarii)

चार तारों के समूह से बना पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र जलकर्म हेतु अति उत्तम माना गया है। इस नक्षत्र में तालाब, कुआं खोदना, नहर बनाना, 

तेल की लाइन बिछाना आदि कार्य किए जाते हैं। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में उग्र कर्म तथा अग्नि कर्म भी किए जा सकते हैं।

21.उत्तराषाढ़ा (Sigma Saggittarii)

दो तारों के समूह से बना उत्तारषाढ़ा नक्षत्र ध्रुव-स्थिर प्रकृति वाला ऊर्ध्वमुखी नक्षत्र है। इस नक्षत्र के स्वामी विश्वेदेव हैं। 

इसे बुद्धिप्रदाता नक्षत्र भी माना गया है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में ध्वज, पताका, छत, तोरण, पुल/पुलिया बनवाना, मुकुट आदि का निर्माण करना, 

हल चलाना, बीज बोना, वाहन चलाना, रेलवे लाइन बिछाना आदि कार्य प्रशस्त हैं।

22.अभिजित् (Vega)

आकाश के सर्वाधिक चमकदार नक्षत्रों में एक अभिजित् अकेला ऐसा नक्षत्र है जो आकाशगंगा से बाहर है, अतः इसे मुहूर्त के अतिरिक्त 

अन्य कार्यों हेतु नहीं गिना जाता। 

अभिजित् नक्षत्र में तीन तारे त्रिकोणाकृति में दिखआई देते हैं। इस नक्षत्र को प्रतीक्षालय (यात्रागार) के निर्माण हेतु उचित माना गया है।

23.श्रवण (Alpha Aquilae)

यह नक्षत्र तीन तारों से मिलकर बना है जो विष्णु के तीन पगों के आकार में माने गए हैं। श्रवण नक्षत्र के स्वामी भगवान विष्णु है। 

यह ऊर्ध्वमुखी नक्षत्र है। इसमें यज्ञशाला का निर्माण, जनेऊ संस्कार, कृषिकार्य, कथावाचन, प्रवचन, धर्मग्रन्थों का लेखन, विवाह आदि, 

वाहन की सवारी, पहाड़ों की यात्रा, तीर्थयात्रा, दूरसंचार साधानों का उपयोग आदि करना शुभ माना गया है।

24. धनिष्ठा (Beta Delphini)

मृदंग के आकार सदृश दिखाई देने वाले चार तारों के समूह से बना धनिष्ठा नक्षत्र शुभ नक्षत्रों में माना गया है। इस नक्षत्र को विद्यारंभ हेतु

 श्रेष्ठ बताया गया है। 

इस नक्षत्र में बीज बोना, वाहन प्रयोग, यात्रा, जनेऊ संस्कार, रोजगार, वाणिज्य, व्यवसाय आदि कार्य प्रशस्त है।

25.शतभिषा (Lambda Aquarii)

शतभिषा नक्षत्र के स्वामी वरुण देव है। यह नक्षत्र मैत्री कार्य, वाणिज्य, व्यापार, चुनाव-प्रचार, प्रचार-प्रसार, क्रय-विक्रय, कृषि कार्य, यात्रा, 

गौशाला, गजशाला, अश्वशाला, गैरेज आदि के निर्माण तथा प्रवेश के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक

 वाद-विवाद में कुशल, विद्वान तथा प्रभावशाली वक्ता होता है।

26. पूर्वाभाद्रपदा (Alpha Pegasi)

उग्र तथा क्रूर स्वभाव वाले पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र के स्वामी अजैकपात् नामक देव है। इस नक्षत्र को जलसंबंधी कार्यों हेतु यथा कुआं, तालाब, 

नहर, तड़ाग, पानी की टंकी, टैंक, जल पात्र आदि के निर्माण तथा उपयोग हेतु प्रशस्त बताया गया है। इस नक्षत्र को ‘पूर्वाप्रौष्ठपदा’ भी कहा जाता है।

27.उत्तराभाद्रपदा (Gamma Pegasi)

दो तारों के समूह से बने उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र के स्वामी अहिर्बुध्न्य है। यह विवाह का नक्षत्र है जिसमें स्थिर कार्य, कृषि कार्य, कूप, तालाब, 

तड़ाग आदि का निर्माण, मैत्री संबंध बनाना, अश्वशाला का निर्माण, वाहन प्रयोग, संन्यासग्रहण, वानप्रस्थग्रहण, गृहत्याग आदि कार्य 

किए जाते हैं। उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र को ‘उत्तरप्रौष्ठपदा’ भी कहा जाता है।

28.रेवती (Zeeta Piscium) 32 तारों वाले रेवती नक्षत्र को ‘पौष्ण’ भी कहा जाता है, इसके देवता पूषा है। रेवती नक्षत्र में धार्मिक कार्य,

 विवाह, मैत्रीकर्म आदि कार्य करना शुभ होता है। रेवती नक्षत्र में कृषि कार्य, मकान बनाना, यात्रा करना, देवप्रतिमा की प्रतिष्ठा करना 

आधि कार्य श्रेष्ठ बताए गए हैं, परन्तु धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवतीपर्यन्त तक के नक्षत्र पंचक कहलाते हैं 

जिनमें कोई भी शुभ कार्य नहीं करने की आज्ञा दी गई है।

 
 
  
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होली का त्‍योहार बुराई पर अच्‍छाई की जीत का प्रतीक है. होली में जितना महत्‍व रंगों का है उतना ही महत्‍व होलिका दहन का भी है. रंग वाली होली से एक दिन पहले होली जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन कहते हैं. होलिका दहन की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं. सूखी टहनियां, लकड़ी और सूखे पत्ते इकट्ठा कर उन्‍हें एक सार्वजनिक और खुले स्‍थान पर रखा जाता है,पूर्णिमा की तिथि पर सूर्य अस्त होने के बाद प्रदोष काल में होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन की अग्नि को पवित्र माना जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत की अग्नि होती है। कुछ लोग इस अग्नि में नई फसल को भूनकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं और भगवान की पूजा की जाती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। इस शुभ दिन पर कुछ लोग भगवान के प्रति आस्था मजबूत करने के लिए व्रत भी रखते हैं और कथा पढ़ते हैं।होलिका दहन के साथ ही बुराइयों को भी अग्नि में जलाकर खत्‍म करने की कामना की जाती है.   होलिका दहन कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात्रि ही होलिका दहन किया जाता है. यानी कि रंग वाली होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है. इस बार होलिका दहन 9 मार्च को किया जाएगा, जबकि रंगों वाली होली 10 मार्च को है. होलिका दहन के बाद से ही मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं. मान्‍यता है कि होली से आठ दिन पहले तक भक्त प्रह्लाद को अनेक यातनाएं दी गई थीं. इस काल को होलाष्टक कहा जाता है. होलाष्टक में मांगलिक कार्य नहीं होते हैं. कहते हैं कि होलिका दहन के साथ ही सारी नकारात्‍मक ऊर्जा समाप्‍त हो जाती है. होलिका दहन का शुभ मुहूर्त  जानते हैं कि होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है और इस मौके शुभ मुहूर्त देखने के लिए दो बातों को ध्यान रखा जाता है.  पहला, उस दिन “भद्रा” न हो। दूसरा, पूर्णिमा प्रदोषकाल-व्यापिनी होनी चाहिए। सरल शब्दों में कहें तो उस दिन सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्तों में पूर्णिमा तिथि होनी चाहिए। इस बार 9 मार्च 2020 सोमवार को होलिका दहन के समय भद्राकाल की बाधा नहीं रहेगी। फाल्गुन माह की पूर्णिमा यानी होलिका दहन के दिन भद्राकाल सुबह सूर्योदय से शुरू होकर दोपहर करीब डेढ़ बजे ही खत्म हो जाएगा।  इसलिए शाम को प्रदोषकाल में होलिका दहन के समय भद्राकाल नहीं होने से होलिका दहन शुभ फल देने वाला रहेगा। जिससे रोग, शोक और दोष दूर होंगे।9 मार्च 2020 को सुबह 3 बजकर 3 मिनट से पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी 9 मार्च को सोमवार है और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है वहीं पूर्णिमा तिथि सोमवार को होने से चंद्रमा का प्रभाव ज्यादा रहेगा। क्योंकि ज्योतिष के अनुसार सोमवार को चंद्रमा का दिन माना जाता है। इसके साथ ही स्वराशि धनु में स्थित देवगुरु बृहस्पति की दृष्टि चंद्रमा पर रहेगी। जिससे गजकेसरी योग का प्रभाव रहेगा।इस बार होली भद्रा रहित, ध्वज एवं गजकेसरी योग भी बन रहा है। इसके बाद 10 मार्च को रंग वाली होली में त्रिपुष्कर योग बनेगा। इस साल होली पर गुरु और शनि का विशेष योग बन रहा है। ये दोनों ग्रह अपनी-अपनी राशि में रहेंगे।  तो इस बार होली का यह पावन पर्व ग्रहों के शुभ संयोग के कारण शुभ फलदाई मानी गई है होलिका दहन का शुभ मुहूर्त  होलिका दहन की तिथि: 9 मार्च 2020 पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 9 मार्च 2020 को सुबह 3 बजकर 3 मिनट से  पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 9 मार्च 2020 को रात 11 बजकर 17 मिनट तक  होलिका दहन मुहूर्त: शाम 6 बजकर 26 मिनट से रात 8 बजकर 52 मिनट तक होली का दहन की महिमा रंग वाली होली से भी ज्यादा मानी गई है .भारतीय परंपरा में पुराने साल को विदाई देते हुए नए साल के आगमन की खुशियां मनाई जाती है पुराना साल जिसे संवत कहते हैं को विदाई देने के लिए होली का पावन पर्व मनाया जाता है इसलिए होलिका दहन को संवत जलाना भी कहते चैत्र शुक्ल पक्ष के पहले दिन से जब नवरात्रि शुरू होते हैं तो भारतीय नव संवत की शुरुआत हो जाती है होलिका की अग्नि में पुराने साल और संवत की यादों को समस्याओं को परेशानियों को जलाते हुए जीवन की सारी पुरानी साल की मुश्किलों से निजात पाया जाता है माना जाता है कि इस राख को घर पर लाकर उससे अपने सभी परिवार के लोग अपने माथे पर तिलक करें तो निश्चित ही पिछले साल की सारी नकारात्मकता खत्म हो जाती है पुराने साल की विदाई और नए साल की खुशियां बनाने के साथ-साथ होलिका दहन के पर्व पर किसी भी तरह की आर्थिक समस्या व मानसिक परेशानी हो धन संबंधी समस्याओं से लेकर स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या का समाधान किया जा सकता है.. ज्योतिष के हिसाब से कुछ ऐसे उपाय होते हैं जिन्हें अगर आप होलिका दहन के अवसर पर करें और होलिका के जलने के साथ उन चीजों को अग्नि में डाले तीन बार परिक्रमा करते हुए प्रार्थना करें तो आपकी प्रार्थना जरूर पूरी होती है तो चलिए उन्हीं सभी छोटे-छोटे उपायों की बात करते हैं 1. बीमारी से मुक्ति के लिए और सेहत में लाभ के लिए अच्छा स्वास्थ्य पाने के लिए इस दिन एक मुट्ठी काले तिल होलिका की अग्नि में डाले ,कोई बीमारी से मुक्ति पाना चाहता है तो हरी इलायची और कपूर डालें तीन परिक्रमा करते हुए बीमारी से मुक्ति की प्रार्थना करें 2. धन प्राप्ति के लिए और किसी भी तरह की आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं. तू होली के दिन एक छोटी सी चंदन की लकड़ी होली की अग्नि में डाल देतीन बार परिक्रमा करते हुए प्रार्थना करें 3. अगर किसी को रोजगार की समस्या है यह व्यापार या व्यवसाय में परेशानी आ रही है तो इसके लिए एक मुट्ठी पीली सरसों के दाने होलिका की अग्नि में डालें निश्चित ही व्यापार संबंधी रोजगार संबंधी सारी समस्याएं दूर होंगी 4. अगर किसी को विवाह की समस्या आ रही है विवाह नहीं हो पा रहा, वैवाहिक जीवन में परेशानी और दिक्कतें आ रही हैं खुशहाली नहीं है तो उसके लिए हवन सामग्री लेकर जरा सा देसी घी मिलाकर उसे होलिका की अग्नि में डालें तो निश्चित ही जीवन में सभी तरह की समस्याएं दूर होती हैं 5. किसी भी तरह के तंत्र मंत्र नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए एक मुट्ठी काली सरसों को अपने सिर पर से एंटी क्लॉक वाइज 7 बार घुमाकर होली की जलती हुई अग्नि में डाल दिया जाए तो जीवन की सारी नकारात्मकता खत्म हो जाती हैहोलिकादहन करने या फिर उसके दर्शन मात्र से भी व्यक्ति को शनि-राहु-केतु के साथ नजर दोष से मुक्ति मिलती है। होली की भस्म का टीका लगाने से नजर दोष तथा प्रेतबाधा से मुक्ति मिलती है। 6. जिन लोगों को अपनी नाम राशि लग्न राशि नहीं पता यह जिनको अपनी जन्म कुंडली के बारे में ज्ञान नहीं है वह लोग होलिका दहन के दिन गोबर के उपले गेहूं की बालियां और काले तिल लेकर होलिका की जलती अग्नि में डालकर तीन बार परिक्रमा करके प्रार्थना करें तो उनके जीवन में से सभी तरह की समस्याएं विघ्न बाधाएं अपने आप खत्म हो जाते हैं ..और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है 7. किसी को मन संबंधी समस्याएं मानसिक परेशानी है या किसी की कुंडली में चंद्रमा पीड़ित है तो वह होलिका दहन के बाद घर आकर अपने हाथ पैर धोकर अगर चंद्रमा के दर्शन करते हुए चंद्रमा की रोशनी में बैठे और श्री कृष्ण के किसी भी मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय ,ओम क्लीम कृष्णाय नमः, या गीता का पाठ करें तो निश्चित रूप से उनके सभी तरह की मानसिक परेशानियां दूर होने के साथ-साथ जीवन के सभी दिक्कत और परेशानियां खत्म हो जाती है मन मजबूत होता है
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14 मार्च से सूर्य एक माह तक मीन राशि में रहेंगे। मीन का स्वामी गुरु होता है। इस पूरे एक माह सात्विक रहिये। मन, वचन तथा कर्म से अहिंसा का पालन करना चाहिए। सूर्य एक राशि में एक माह रहते हैं। 14 मार्च से सूर्य एक माह तक मीन राशि में रहेंगे। मीन का स्वामी गुरु होता है। गुरु सूर्य का मित्र ग्रह है। सूर्य आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं। गुरु बहुत ही प्रभावशाली तथा महत्वपूर्ण ग्रह है। अतः मीन संक्रांति से सर्वाधिक मीन राशि ही प्रभावित होगी। मीन राशि पर मीन में सूर्य के गोचर का निम्न परिणाम हो सकता है- जब तक सूर्य गुरु के घर में रहते हैं तब तक कोई भी शुभ कार्य वर्जित रहता है। इस समय मीन राशि के जातकों को कोई नया कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए। इस समय आय प्राप्ति तो होगी लेकिन आप कुछ बड़े महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं जिससे धन का व्यय कुछ ज्यादा ही होगा। बच्चों का मन थोड़ा चंचल रहेगा, छात्रों का मन पढ़ाई से भटक सकता है। व्यवसाय में सिंह, कर्क या धनु राशि के लोगों के सहयोग से कोई बड़ा और नया व्यापार प्रारम्भ कर सकते हैं। स्वास्थ्य के दृष्टि से उदर विकार तथा नेत्र विकार की समस्या आ सकती है। उपाय तथा दान- 1- प्रतिदिन श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करें। 2- एक माला गायत्री मंत्र पढ़ें। 3- प्रत्येक गुरुवार को श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। 4- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें 5- प्रत्येक गुरुवार को गाय को केला तथा रविवार को गुड़ खिलाएं। 6- गुरुवार को चने की दाल का दान करें। 7- रविवार को गेंहू का दान करें। 8- स्वर्ण या ताबें का दान करें। 8- श्री रामचरितमानस के अरण्यकाण्ड का प्रत्येक गुरुवार को पाठ करें। 9- धार्मिक पुस्तकों का दान करें इस प्रकार इतना उपाय करने से आपके प्रत्येक कार्य सफल होना प्रारम्भ हो जाएंगे। इस पूरे एक माह सात्विक रहिये। मन, वचन तथा कर्म से अहिंसा का पालन करना चाहिए। माता-पिता तथा गुरु का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करने से आपके समस्त पापों का नाश होकर अनंत पुण्य की प्राप्ति होगी।
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