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येषां न विद्या न तपो न दानं न चापि शीलं च गुणो न धर्मः। ते मर्त्यलोके भुवि भारभूता मनुष्यरुपेण मृगाश्चरन्ति॥ Those who have neither knowledge nor penance, nor liberty, nor knowledge, nor good conduct, nor virtue, nor the observance of duties, pass their life in this world of mortals like beasts in human form and are only a burden on the planet. *जिन लोगों ने न तो विद्या-अर्जन किया है, न ही तपस्या में लीन रहे हैं, न ही दान के कार्यों में लगे हैं, न ही ज्ञान अर्जित किया है, न ही अच्छा आचरण करते हैं, न ही गुणों को अर्जित किया है और न ही धार्मिक अनुष्ठान किये हैं, वैसे लोग इस मृत्युलोक में मनुष्य के रूप में मृगों की तरह भटकते रहते हैं और ऐसे लोग इस धरती पर भार की तरह।* हरि ॐ, प्रणाम, जय सियाराम।
posted Apr 14 by anonymous

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ॐ सहनाववतु सहनौ भुनक्तु सह वीर्यं करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषा वहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्ति:॥ May He protect and nourish us togather. May we all acquire the capacity to study brilliantly and not quarrel with each other. Om peace, peace, peace #सर्वशक्तिमान ईश्वर हमें सुरक्षित रखें और पालन पोषण करें | बहुत बढ़िया विद्याभ्यास की योग्यता बढ़ाएं और आपस में झगडा न करें |* ॐ शांति शांति शांति हरि ॐ,प्रणाम, जय सियाराम।
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धॄति: क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रह:। धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्॥ There are ten characteristics of 'Dharma' - patience, forgiveness, self-control, non- stealing, purity, control of senses, intelligence, knowledge, truth, non-anger. *धर्म के दस लक्षण हैं - धैर्य, क्षमा, आत्म-नियंत्रण, चोरी न करना, पवित्रता, इन्द्रिय-संयम, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना॥* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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सर्वदा सर्वकार्येषु नास्ति तेषाममङ्गलम् | येषां हृदिस्थो भगवान् मङ्गलायतनो हरिः || In all activities and at all times, there will be no inauspicious and obstacles for those persons, in whose heart resides bhagavaan Hari - the home of the auspiciousness *जिसके हृदय में श्रीहरि हों, जो स्वयं मंगलायातन हैं उनका वास हो, उनके सदैव सर्व कार्य निर्विघ्न और मंगलकारी होते हैं।* *देवउठनी एकादशी कि हार्दिक शुभकामनाएं* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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अधमा: धनमिच्छन्ति धनं मानं च मध्यमा: | उत्तमा: मानमिच्छन्ति मानो हि महताम् धनम् || An inferior person's desire is money. An average person will desire money and respect. A great person desires respect (and not Money). Great people consider respect as the greatest wealth. *एक अधीनस्थ आदमी हमेशा धन की चाह रखता है। एक साधारण मनुष्य धन और सम्मान की ईच्छा रखता है। मगर उच्च कोटी के लोग सिर्फ सम्मान की आकांक्षा करते हैं क्योंकि वे सम्मान को ही सच्चा धन समझते हे।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्। पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥ Knowledge gives humility, humility leads to capability, from capability one acquires wealth, wealth leads to righteousness and then happiness follows. *विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन की प्राप्ति होती है, धन से धर्म और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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