top button
    Futurestudyonline Community

शनिश्चरी अमावस्या के महत्वपूर्ण तत्व

0 votes
120 views
आज है शनिश्चरी अमावस्या? ************************* शनि अमावस्या के दिन भगवान सूर्य देव के पुत्र शनि देव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। किसी माह के जिस शनिवार को अमावस्या पड़ती है, उसी दिन 'शनि अमावस्या' मनाई जानी है। यह 'पितृकार्येषु अमावस्या' और 'शनिश्चरी अमावस्या' के रूप में भी जानी जाती है। 'कालसर्प योग', 'ढैय्या' तथा 'साढ़ेसाती' सहित शनि संबंधी अनेक बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए 'शनि अमावस्या' एक दुर्लभ दिन व महत्त्वपूर्ण समय होता है। पौराणिक धर्म ग्रंथों और हिन्दू मान्यताओं में 'शनि अमावस्या' की काफ़ी महत्ता बतलाई गई है। इस दिन व्रत, उपवास, और दान आदि करने का बड़ा पुण्य मिलता है। भाग्य विधाता शनि देव ******************** भगवान सूर्य देव के पुत्र शनि देव का नाम सुनकर लोग सहम से जाते है, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। यह सही है कि शनि देव की गिनती अशुभ ग्रहों में होती है, लेकिन शनि देव मनुष्यों के कर्मों के अनुसार ही फल देते है। भगवान शनि देव भाग्य विधाता हैं। यदि निश्छल भाव से शनि देव का नाम लिया जाये तो व्यक्ति के सभी कष्ट और दु:ख दूर हो जाते हैं। श्री शनि देव तो इस चराचर जगत में कर्मफल दाता हैं, जो व्यक्ति के कर्म के आधार पर उसके भाग्य का फैसला करते हैं। इस दिन शनि देव का पूजन सफलता प्राप्त करने एवं दुष्परिणामों से छुटकारा पाने हेतु बहुत उत्तम होता है। इस दिन शनि देव का पूजन सभी मनोकामनाएँ पूरी करता है। 'शनिश्चरी अमावस्या' पर शनि देव का विधिवत पूजन कर सभी लोग पर्याप्त लाभ उठा सकते हैं। शनि देव क्रूर नहीं, अपितु कल्याणकारी हैं। इस दिन विशेष अनुष्ठान द्वारा पितृदोष और कालसर्प दोषों से मुक्ति पाई जा सकती है। इसके अतिरिक्त शनि का पूजन और तैलाभिषेक कर शनि की 'साढ़ेसाती', 'ढैय्या' और 'महादशा' जनित संकट और आपदाओं से भी मुक्ति पाई जा सकती है। शनि देव को परमपिता परमात्मा के जगदाधार स्वरूप 'कच्छप' का ग्रहावतार और 'कूर्मावतार' भी कहा गया है। वह महर्षि कश्यप के पुत्र सूर्य देव की संतान हैं। उनकी माता का नाम 'छाया' है। इनके भाई 'मनु सावर्णि', 'यमराज', 'अश्विनीकुमार' और बहन का नाम 'यमुना' और 'भद्रा' है। उनके गुरु स्वयं भगवान 'शिव' हैं और उनके मित्र हैं- 'काल भैरव', 'हनुमान', 'बुध' और 'राहु'। समस्त ग्रहों के मुख्य नियंत्रक हैं शनि देव। उन्हें ग्रहों के न्यायाधीश मंडल का प्रधान न्यायाधीश कहा जाता है। शनि देव के निर्णय के अनुसार ही सभी ग्रह मनुष्य को शुभ और अशुभ फल प्रदान करते हैं। न्यायाधीश होने के नाते शनि देव किसी को भी अपनी झोली से कुछ नहीं देते। वह तो केवल शुभ-अशुभ कर्मों के आधार पर ही मनुष्य को समय-समय पर वैसा ही फल देते हैं, जैसे उन्होंने कर्म किया होता है। धन-वैभव, मान-समान और ज्ञान आदि की प्राप्ति देवों और ऋषियों की अनुकंपा से होती है, जबकि आरोग्य लाभ, पुष्टि और वंश वृद्धि के लिए पितरों का अनुग्रह जरूरी है। शनि एक न्यायप्रिय ग्रह हैं। शनि देव अपने भक्तों को भय से मुक्ति दिलाते हैं। Astrology can Help you as navigation for future path of life. We had started Online Consultation Just Download App and Register You will get free Horoscope and You will get 100 Rs gift wallet money for call Now .My GiftCode is : FS16 Use my gift code and talk with me via app using call now button For Astro, Please visit:https://www.futurestudyonline.com/astro-details/16 Expertise :Counselling Therapist,KP Astrology,Lal Kitab Expert,Numerology,Palmistry,Vastu consultation,Vedic Astrology For Mobile App, Please visit: https://play.google.com/store/apps/details?id=futurestudyonline.vedicjyotishvidyapeeth For IOS Mobile App, Please visit: https://apps.apple.com/in/app/futurestudy-online/id1498930538

References

Consultant astrology, astrologer
posted Jul 10 by Rakesh Periwal

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button

Related Articles
0 votes
मान्यता है कि आश्विन अमावस्या के दिन ही पितृपक्ष का समापन होता है इसलिए इस दिन पितरों की पूजा का बेहद महत्व बताया गया है। इस दिन किसी भी पवित्र नदी, जलाशय, या कुंड में स्नान किया जाता है। इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है और उसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण आदि किया जाता है।  इसके बाद शाम के समय दीपक जलाया जाता है और पूड़ी और अन्य खाने की वस्तुएं दरवाजे पर रखी जाती हैं। ऐसा करने के पीछे मान्यता है कि, वापस अपने लोक लौटते वक्त हमारे पितृ भूखे ना रहे और दीपक की रोशनी में उन्हें वापस अपने लोक जाने का रास्ता साफ साफ नजर आए।  इसके अलावा अगर आपको अपने किसी पितृ के श्राद्ध की तिथि याद ना हो तो आज के दिन उनका श्राद्ध भी किया जा सकता है। अगर आप पूरे श्राद्ध पक्ष में अपने पितरों का तर्पण नहीं कर पाए हैं तो आश्विन अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण कर सकते हैं। इस दिन भूले-भटके पितरों के नाम से किसी भी जरूरतमंद को अपनी यथाशक्ति के अनुसार भोजन कराएं तो पुण्य मिलता है।  आश्विन अमावस्या महत्व   पितरों के पूजन के लिए आश्विन अमावस्या/सर्वपितृ अमावस्या का बेहद महत्व बताया गया है। इस दिन को सर्व पितृ अमावस्या और महालय विसर्जन भी कहा जाता है। सिर्फ श्राद्ध कर्म ही नहीं इस दिन तांत्रिक दृष्टिकोण से भी इस दिन का बेहद महत्व होता है। आश्विन अमावस्या की समाप्ति पर अगले दिन से शारदीय नवरात्र शुरू हो जाती हैं। हालाँकि इस वर्ष अधिक मास के चलते नवरात्रि एक महीने बाद से शुरू होगी। श्राद्ध विधि  सर्वपितृ अमावस्या को सुबह स्नान आदि कर गायत्री मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को जल अर्पित करें।  इसके बाद अपने पितरों के लिए शुद्ध भोजन तैयार करें।  पितरों के लिए बनाए जाने वाले भोजन में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल ना करें।  इस दिन घर पर किसी विद्वान ब्राह्मण को बुलाए उन्हें भोजन कराएं और अपनी इच्छाशक्ति शक्ति से उन्हें दान दें।  इसके बाद शाम के समय 2, 5 या फिर 16 दीपक जलाएं।
0 votes
यदि सूर्य कमजोर है तो नित्य सूर्य उपासना सूर्य को अर्ध्य देने से हरिवंशपुराण पढ़ने या सुनने से रविवार का व्रत करने से और सूर्यदेव के नित्य दर्शन करने से सूर्यदेवता प्रसन्न व बली होते हैं। यदि प्रतिदिन ऐसा नहीं कर सकते तो रविवार को सूर्य उपासना करें। शास्त्रों में बताए गए विशेष मंत्र का स्मरण सफलता के साथ व्यक्ति को यशस्वी भी बनाता है। इस उपासना से त्वचा संबंधी रोगों का अंत भी होता है। किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए प्रयास कर रहे व्यक्ति के लिए सूर्य मंत्र का स्मरण कामना सिद्धि प्रदान कर सकता है। रविवार को प्रातः स्नान के बाद यथा संभव लाल कपड़े पहनें तथा सूर्य देव का ध्यान कर पवित्र जल में कुमकुम मिलाकर अर्घ्य दें। पूजा घर में नवग्रह के चित्र अथवा पारद शिवलिंग पर घी का दीपक जलाएं। चमेली के सुगंध वाली अगरबत्ती जलाएं। सूर्य देव और शिवलिंग पर लाल चंदन चढ़ाएं। लाल कनेर के फूल अर्पित करें। सूर्यदेव को लड्डू या गुड़ का भोग लगाएं। पूर्व दिशा की ओर मुख कर किसी लाल आसन पर बैठकर इस मंत्र का लाल चंदन की माला से जाप करें। मंत्रः - ह्रीं सूर्याय सर्वभूतानां शिवायार्तिहराय च। नमः पद्मप्रबोधाय नमो वेदादिमूर्तये।।
0 votes
पितृ पक्ष अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए कौन-कौन सा उपाय करना शुभ होगा। 1. कर्मकांड के जानकारों की मानें हो पितृ पक्ष अमावस्या और शनि अमावस्या का सबसे अधिक लाभ उठान के लिए जरूरतमंदों को काले तिल, जौ, कपड़े, जूते, उड़द दाल और गुड़ आदि दान करना चाहिए। 2. पितृ पक्ष अमावस्या के दिन पीपल की विशेष पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि इस दिन पीपल के पेड़ में शनिदेव का निवास होता है। इसके अलावा पितृ पक्ष की अमावसाया के दिन पीपल के पत्ते पर जल और तिल के साथ पांच प्रकार की मिठाईयां रखनी चाहिए। 3. पितृ पक्ष अमावस्या यानि श्राद्ध के अंतिम दिन गाय, कौआ, कुत्ता और चींटी को भोजन कराना शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितर खुश होकर परलोक गमन करते हैं।
0 votes
पूरा जरूर पड़े अतिमहत्वपूर्ण जानकारी हिन्दू धर्म में कुछ संख्याओं का विशेष महत्व एक ओम्कार्
Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...