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Akshaya Tritiya is one of most auspicious tithi of hindu calendar.

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Akshaya Tritiya 2018: Significance of the festival Akshaya Tritiya is believed to be one of the most important tithi of the Hindu astrology. Akshaya is a term in Sanskrit that means imperishable, eternal & Tritiya means third. Akshaya Tritiya is celebrated on the third lunar day of the bright fortnight of the spring month of Vaisakha. This auspicious day will be observed this year 18th April 2018. It is said that the sun and the moon become equally bright on this auspicious day. The Sun becomes exalted in Aries & Moon is in Taurus. All learned astrologers know that The Sun & the Moon are the best planets of the zodiac. They are called soul & mind of the natal. In practical life also mother & father play most important role in our life. Their support is the best support. Hence, when there is a best support of parents then who the hell others are. That’s why the trithi is called Akshaya, It is believed that this day brings good fortune and luck in everyone’s life.. On this auspicious tithi or day, most people start new business, buy land or jewellery and invest in something. It is believed to initiate new beginnings on this day in order to bring good fortune and luck. So let’s celebrate this day doing pujan, prayer, donation etc. with a purified mind. Best of luck. Akshaya Tritiya 2018: Festival puja muhurat and timings Auspicious muhurat timings to buy gold: 06:07 am to 12:26 pm Tritiya tithi begins at 3:45 am on 18th April, 2018 Tritiya tithi ends at 01:29 am on 19th April, 2018 This Akshaya Tritiya 2018, celebrate by wishing for luck, happiness and joy in the days to come.

posted Apr 18, 2018 by Vaswati Baksiddha

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अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव चः। धर्मो रक्षति रक्षितः। अर्थात ...... सत्य उद्घाटन : रावण द्वारा सीता हरण करके श्रीलंका जाते समय पुष्पक विमान का मार्ग क्या था ? उस मार्ग में कौनसा वैज्ञानिक रहस्य छुपा हुआ है ? उस मार्ग के बारे में लाखों साल पहले कैसे जानकारी थी ? पढ़ो इन प्रश्नों के उत्तर वामपंथी इतिहारकारों के लिए मृत्यु समान हैं | भारतबन्धुओ ! रावण ने माँ सीता का अपहरण पंचवटी (नासिक, महाराष्ट्र) से किया और पुष्पक विमान द्वारा हम्पी (कर्नाटका), लेपक्षी (आँध्रप्रदेश ) होते हुए श्रीलंका पहुंचा | आश्चर्य होता है जब हम आधुनिक तकनीक से देखते हैं की नासिक, हम्पी, लेपक्षी और श्रीलंका बिलकुल एक सीधी लाइन में हैं | अर्थात ये पंचवटी से श्रीलंका जाने का सबसे छोटा रास्ता है | अब आप ये सोचिये उस समय Google Map नहीं था जो Shortest Way बता देता | फिर कैसे उस समय ये पता किया गया की सबसे छोटा और सीधा मार्ग कौनसा है ? या अगर भारत विरोधियों के अहम् संतुष्टि के लिए मान भी लें की चलो रामायण केवल एक महाकाव्य है जो वाल्मीकि ने लिखा तो फिर ये बताओ की उस ज़माने में भी गूगल मैप नहीं था तो रामायण लिखने वाले वाल्मीकि को कैसे पता लगा की पंचवटी से श्रीलंका का सीधा छोटा रास्ता कौनसा है ? महाकाव्य में तो किन्ही भी स्थानों का ज़िक्र घटनाओं को बताने के लिए आ जाता | लेकिन क्यों वाल्मीकि जी ने सीता हरण के लिए केवल उन्ही स्थानों का ज़िक्र किया जो पुष्पक विमान का सबसे छोटा और बिलकुल सीधा रास्ता था ? ये ठीक वैसे ही है की आज से 500 साल पहले गोस्वामी तुलसीदास जी को कैसे पता की पृथ्वी से सूर्य की दूरी क्या है ? (जुग सहस्त्र जोजन पर भानु = 152 मिलियन किमी - हनुमानचालीसा), जबकि नासा ने हाल ही कुछ वर्षों में इस दूरी का पता लगाया है | अब आगे देखिये... पंचवटी वो स्थान है जहां प्रभु श्री राम, माता जानकी और भ्राता लक्ष्मण वनवास के समय रह रहे थे | यहीं शूर्पणखा आई और लक्ष्मण से विवाह करने के लिए उपद्रव करने लगी विवश होकर लक्ष्मण ने शूपर्णखा की नाक यानी नासिका काट दी | और आज इस स्थान को हम नासिक (महाराष्ट्र) के नाम से जानते हैं | आगे चलिए... पुष्पक विमान में जाते हुए सीता ने नीचे देखा की एक पर्वत के शिखर पर बैठे हुए कुछ वानर ऊपर की ओर कौतुहल से देख रहे हैं तो सीता ने अपने वस्त्र की कोर फाड़कर उसमे अपने कंगन बांधकर नीचे फ़ेंक दिए, ताकि राम को उन्हें ढूढ़ने में सहायता प्राप्त हो सके | जिस स्थान पर सीताजी ने उन वानरों को ये आभूषण फेंके वो स्थान था 'ऋष्यमूक पर्वत' जो आज के हम्पी (कर्नाटक) में स्थित है | इसके बाद | वृद्ध गीधराज जटायु ने रोती हुई सीता को देखा, देखा की कोई राक्षस किसी स्त्री को बलात अपने विमान में लेके जा रहा है | जटायु ने सीता को छुड़ाने के लिए रावण से युद्ध किया | रावण ने तलवार से जटायु के पंख काट दिए | इसके बाद जब राम और लक्ष्मण सीता को ढूंढते हुए पहुंचे तो उन्होंने दूर से ही जटायु को सबसे पहला सम्बोधन 'हे पक्षी' कहते हुए किया | और उस जगह का नाम दक्षिण भाषा में 'लेपक्षी' (आंधप्रदेश) है | अब क्या समझ आया आपको ? पंचवटी---हम्पी---लेपक्षी---श्रीलंका | सीधा रास्ता | सबसे छोटा रास्ता | गूगल मैप का निकला गया फोटो नीचे है | अपने ज्ञान-विज्ञान, संस्कृति को भूल चुके भारतबन्धुओं रामायण कोई मायथोलोजी नहीं है | ये महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखा गया सत्य इतिहास है | जिसके समस्त वैज्ञानिक प्रमाण आज उपलब्ध हैं | इसलिए जब भी कोई वामपंथी हमारे इतिहास, संस्कृति, साहित्य को मायथोलोजी कहकर लोगो को भ्रमित करने का या खुद को विद्वान दिखाने का प्रयास करे तो उसको पकड़कर बिठा लेना और उससे इन सवालों के जवाब पूछना | विश्वाश करो एक का भी जवाब नहीं दे पायेगा | अब इस सबमे आपकी ज़िम्मेदारी क्या है ? आपके हिस्से की ज़िम्मेदारी ये है की अब जब टीवी पर रामायण देखें तो ये ना सोचें की कथा चल रही है बल्कि निरंतर ये ध्यान रखें की ये हमारा इतिहास चल रहा है | इस दृष्टि से रामायण देखें और समझें | विशेष आवश्यक ये की यही दृष्टि हमारे बच्चों को दें, बच्चों को ये बात 'बोलकर' कम से कम एक-दो बार कहें की 'बच्चो ये कथा कहानी नहीं है, ये हमारा इतिहास है, जिसको मिटाने की कोशिश की गई है |' इधर हम आपको नित्य भारत के इतिहास-संस्कृति के वैज्ञानिक प्रमाणों वाली जानकारी उपलब्ध करते रहेंगे | ताकि भारत राष्ट्र संस्कृति बचाने की इस लड़ाई में आपके पास सबूत और प्रमाण हर समय उपलब्ध रहें | --------------------------------------------------
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                             Colors of palm

 

Palm reading is one of the art of prediction of human’s future. Mainly health status of the person can be distinctly judge by reading the colors of palm. Colors of palm signify certain diseases. .Although the colors of palm may vary from one country to another. Yet generally the color of normal palm is a light red or pinkish red with a shiny, smooth texture. If the color appears either darker or lighter than normal, this may indicates that the condition of health is abnormal.

 

Here are some signs of diseases, which are due to the abnormal palm colors

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  Pale White

 

 A palm appearing pale white in color, indicates anemia or possibly occult bleeding & when the palm looks white, this usually indicates lung disease or inflammation in the body.

 

Blue:

 

 A Blue palm usually indicates intestinal obstruction.

 

 Green

 

 A Palm with a dark green color, usually indicates obstruction in the circulation of the blood & a light greenish palm indicates anemia or Spleen or stomach oriented disease.

 

 

Yellow

 

 A sallow yellow palm usually indicate chronic disease. A palm with a bright, golden yellow color often seen in the liver disease accompanied by jaundice. In this case, there is liver/gallbladder damp heat.  If the palm skin grows thicker, stiffer and is dry with a light yellow, shiny, smooth surface this is the indication of palm calcar keratosis. A palm that looks yellowish brown and has no sheen indicates the possibility of cancer.

 

 Red

 

 A palm with Red, net like capillaries often appears with Vitamin C deficiency. When the whole palm is covered with dark red or purple spots, this is for liver problem.  The palm that first appears red and gradually changes to dark purple is usually a sign of heart disease.

 

 

 Purple

 

Purple colored palm is the indication of infectious disease.

 

 Grey

 

 Thin Cigarette-ash like spots on the palm are sign of heart disease in a heavy smoker.

 

 Black

 

A palm that looks black is often seen in kidney disease. If the central part of the palm looks brownish–black, this often indicates gastro-intestinal disease.


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